छत्तीसगढ़

आचार संहिता में आंशिक छूट का विरोध भाजपा की विकास विरोधी मानसिकता – कांग्रेस

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी द्वारा आचार संहिता में आंशिक छूट का विरोध उसकी विकास विरोधी मानसिकता को प्रदर्शित करता है। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि राज्य में तीनों चरणों के लोकसभा के चुनाव सम्पन्न हो चुके है। ऐसे में सामान्य प्रशासनिक कार्यो के लिए आचार संहिता में आंशिक छूट राज्य के जनता के हित में है। अन्य राज्यों में चुनाव और मतगणना में अभी एक महीने का समय है तब तक आचार संहिता के नाम पर सरकार के दैनंदिनी के सामान्य कार्यो में रोक से राज्य की जनता को परेशानी के अलावा कुछ भी हासिल नही होने वाला था। राज्य चुनाव आयोग का रोजमर्रा के कार्यो से आचार संहिता से बंदिश हटाना जनहित में है। भाजपा बौखलाहट के कारण और पूर्वाग्रहवश में इसका विरोध कर रही है। भाजपा चाहती है आचार संहिता एक महीने तक और लगी रहे ताकि जन सामान्य परेशान होते रहे। भाजपा बताएं कि यदि छत्तीसगढ़ में सामान्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं शुरू हो जाएगी तो इससे देश के दूसरे राज्यो में कैसे चुनाव प्रभावित होगा? नियम कानून व्यवस्था बनाने के लिए होते है न कि लोगो को परेशान करने के लिए। भारतीय जनता पार्टी नियम कानून की आड़ में आम जनता को परेशान करना चाहती है। भाजपा के इसी जन विरोधी और अतिवादी चरित्र के कारण जनता ने उसे विधानसभा चुनाव में नकारा था और लोकसभा चुनावों में भी जनता ने भाजपा के खिलाफ मतदान किया है जिसके परिणाम भी 23 मई को आ जायेंगे। भाजपा नेता अपने राजनैतिक ईर्ष्या के स्वभाव को बदलें अन्यथा जनता जनार्दन ने अभी तो सिर्फ 15 सीटों तक समेट दिया है आने वाले दिनों में भाजपा का खाता भी नही खुलेगा।

प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि ईवीएम पर सवाल उठते ही भाजपाइयो को पीड़ा क्यों होने लगती है ? विधानसभा चुनाव में कांग्रेसजनों की मुस्तैदी से कुछ गड़बड़ नही कर पाए थे तो अब लोकसभा चुनाव में उसकी रखवाली पर सवाल खड़ा कर खीझ निकाल रहे । प्रदेश की जनता ने देखा था किस प्रकार रमन राज में संदिग्ध लोग ईवीएम स्ट्रांग रूम के बाहर मंडरा रहे थे। भाजपाई समझ रहे है राज्य में कांग्रेस की सरकार है भूपेश बघेल जैसे निष्पक्ष प्रशासक और संविधान में विश्वास रखने वाले मुख्यमंत्री है कुछ भी गड़बड़ी कर नही पाएंगे। तो इसीलिये भाजपाई अनर्गल और अनावश्यक बयानबाजी कर रहे है । देश का सभी प्रमुख विपक्षी दल ईवीएम के साथ पचास फीसदी वीवीपैट पर्चियों का मिलान करवाना चाहता है तो इसका भाजपा क्यो विरोध कर रही है ? भाजपा बताएं निष्पक्ष चुनाव होने देने में उसका क्या नुकसान है ?

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