WOMEN ENTRY TEMPLE | महिलाओं की एंट्री पर SC में तीखी बहस, क्या बदल जाएगा नियम?

रायपुर डेस्क। धार्मिक स्थलों में महिलाओं की एंट्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज फिर जोरदार बहस हुई। सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने साफ कहा कि कोई भी सेक्युलर कोर्ट सीधे किसी धार्मिक प्रथा को अंधविश्वास नहीं कह सकता। उनका कहना था कि हर समुदाय की अपनी आस्था होती है, जो एक के लिए गलत लगे, दूसरे के लिए धर्म हो सकता है।
लेकिन कोर्ट ने भी सीधा जवाब दिया जस्टिस अमानुल्लाह बोले कि अदालत के पास ये अधिकार है कि वो तय करे क्या सही है और क्या अंधविश्वास। यानी कोर्ट पूरी तरह पीछे नहीं हट सकता।
असल लड़ाई यहां ये है कि क्या धार्मिक परंपराओं के नाम पर महिलाओं को रोका जा सकता है या नहीं। 2018 में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री की इजाजत देने के फैसले के बाद अब 50 से ज्यादा याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है।
9 जजों की बेंच इस पूरे मामले को नए सिरे से देख रही है, जिसमें मंदिर, मस्जिद, दरगाह, हर जगह महिलाओं की एंट्री और बराबरी के अधिकार पर बड़ा फैसला आ सकता है।
अब देश की नजर इस बात पर है कि संविधान जीतेगा या परंपरा को ज्यादा तवज्जो मिलेगी।



