CHHATTISGARH | छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार पर दो बड़े एक्शन, खुलेंगे कई राज?

बिलासपुर/कोंडागांव। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के दो अलग-अलग मामलों में EOW-ACB ने बड़ी कार्रवाई की है। बिलासपुर में बर्खास्त जीआरपी आरक्षक के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में अभियोग पत्र पेश किया गया है। वहीं, कोंडागांव में बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में 36.79 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता के मामले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक के खिलाफ करीब 1500 पन्नों का चालान अदालत में पेश किया गया है।
आरक्षक के खर्च ने खड़े किए सवाल
बिलासपुर के मामले में आरोपी लक्ष्मण गाईन की कुल आय 86.76 लाख रुपये दर्ज की गई, जबकि कुल खर्च करीब 1.90 करोड़ रुपये पाया गया। जांच के मुताबिक, आय से 1.03 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुआ। ACB ने 1 दिसंबर 2024 को आरोपी के निवास समेत अन्य ठिकानों पर छापेमारी की थी। अब साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया है।
लक्ष्मण गाईन पर गांजा तस्करी से जुड़े मामले में भी आरोप हैं। इसी प्रकरण के चलते उन्हें 19 नवंबर 2024 को पुलिस सेवा से पृथक कर दिया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह गांजा तस्करी के मामले में बिलासपुर जेल में बंद हैं।
बैंक खातों से 36.79 लाख रुपये ट्रांसफर
दूसरा मामला कोंडागांव जिले की बड़े डोंगर स्थित बैंक ऑफ इंडिया शाखा का है। जांच के अनुसार, तत्कालीन शाखा प्रबंधक भावेश विश्वकर्मा के कार्यकाल में विभिन्न बैंक खातों से 36,79,323 रुपये अनधिकृत रूप से दूसरे खातों में ट्रांसफर किए गए। आरोप है कि बैंकिंग सिस्टम में अन्य अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल किया गया।
EOW-ACB ने दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों की जांच के बाद विशेष न्यायालय में चालान पेश किया। बैंक ने भावेश विश्वकर्मा को 27 सितंबर 2022 को बर्खास्त कर दिया था।
दोनों मामलों में अब आगे की कार्रवाई न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत होगी।



