CHHATTISGARH | धान खरीदी से पहले सरकार का यू-टर्न

रायपुर. छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने संयुक्त खातों में दर्ज सभी सह-खातेदार किसानों का एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य करने का आदेश वापस ले लिया है। अब धान बेचने के लिए केवल खाते के लंबरदार किसान का एग्रीस्टैक पंजीयन जरूरी होगा।
पुराने आदेश में क्या बदला?
5 अक्टूबर को जारी आदेश के मुताबिक, अब संयुक्त खाते में शामिल हर किसान को अलग से एग्रीस्टैक पंजीयन कराने की अनिवार्यता नहीं रहेगी। इससे उन परिवारों को राहत मिलेगी, जिनकी जमीन संयुक्त खाते में दर्ज है और जिनके सभी सदस्यों का पंजीयन कराने में परेशानी हो रही थी।
क्यों उठाना पड़ा कदम?
इस साल 24 जून को जारी आदेश में संयुक्त खातेदारों में शामिल सभी किसानों का एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया था। इसका उद्देश्य किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना था, लेकिन व्यवस्था लागू करने में व्यावहारिक दिक्कतें सामने आने लगीं।

खासकर ऐसे परिवारों को परेशानी हो रही थी, जिनकी जमीन में कई सह-खातेदार दर्ज हैं। कुछ मामलों में परिवार के सदस्य अलग-अलग स्थानों पर रहते हैं, जिससे सभी का पंजीयन कराना मुश्किल हो रहा था। किसान संगठनों ने भी इस समस्या पर शासन-प्रशासन का ध्यान खींचा था।
धान बेचने वालों के लिए क्या जरूरी?
नए आदेश के बाद संयुक्त खाते में धान बेचने के लिए लंबरदार किसान का एग्रीस्टैक पंजीयन जरूरी होगा। दूसरे सह-खातेदारों के लिए अलग से पंजीयन की अनिवार्यता हटा दी गई है।
सरकार के इस फैसले से धान खरीदी से पहले किसानों की परेशानी कम होने की उम्मीद है। किसानों को सलाह है कि धान बेचने से जुड़ी बाकी जरूरी औपचारिकताओं की जानकारी संबंधित समिति से जरूर लें।



