CHHATTISGARH | 100 करोड़ का सर्वे, ऐप पर सवाल!

रायपुर। छत्तीसगढ़ में फसल गिरदावरी के लिए करीब 100 करोड़ रुपये की परियोजना लेने वाली रामटेक सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस कंपनी का काम सवालों के घेरे में है। आरोप है कि कंपनी एक साल भी काम पूरा किए बिना परियोजना छोड़कर चली गई। अब फसल सर्वे के लिए पटवारियों और सर्वेयरों को प्ले स्टोर के बजाय निजी लिंक से एप डाउनलोड करने को कहा जा रहा है।
राजस्व पटवारी संघ के अध्यक्ष भागवत साहू का दावा है कि पीबीएफ (फिजिकल वेरिफिकेशन) एप डाउनलोड करते समय ‘हार्मफुल सॉफ्टवेयर’ का अलर्ट दिखाई देता है। उन्होंने कंपनी के कामकाज की जांच कराने की मांग की है।
सर्वे में तकनीकी अड़चनें
शिकायतों के मुताबिक, एप का सर्वर बार-बार फेल हो रहा है। खेतों की तस्वीरें अपलोड करने और लोकेशन दर्ज करने में भी परेशानी आ रही है। इससे मैदानी सर्वे प्रभावित होने और आंकड़ों की शुद्धता पर सवाल उठने की बात कही जा रही है।
एप में सर्वेयरों को खेत की चारों दिशाओं के अक्षांश-देशांतर दर्ज करने हैं। साथ ही धान की किस्म, बीज खरीदने की जगह और बीज के बोरे पर दर्ज रेफरेंस नंबर की जानकारी भी देनी है।
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान का वास्तविक रकबा तय करने के लिए फसल सर्वे अहम है। ऐसे में तकनीकी खामियों का दूर होना जरूरी है।
वहीं, राजस्व विभाग के संचालक विनीत नंदनवार ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि पटवारियों को सौंपे गए दायित्व पूरे करने चाहिए, ताकि शासन का काम सुचारू रूप से हो सके। अब कंपनी की भूमिका और एप की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।



