CHHATTISGARH CONGRESS | 41 जिलाध्यक्षों की कुर्सी पर नजर?

रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में 41 जिलाध्यक्षों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जा रहा है। धरना-प्रदर्शन से लेकर ब्लॉक और बूथ स्तर की बैठकों तक, संगठन के हर काम का हिसाब लिया जा रहा है। नवंबर में होने वाली समीक्षा के बाद कुछ जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारी पर फैसला हो सकता है।
जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस का राष्ट्रीय स्तर का ‘कनेक्ट’ प्लेटफॉर्म जिलाध्यक्षों की गतिविधियों पर नजर रखने का माध्यम बना है। इसमें पदाधिकारियों को रोज के टास्क दर्ज करने होते हैं और अगले दिन उसकी प्रगति का फीडबैक देना होता है। काम के प्रमाण के तौर पर फोटो, वीडियो और मीडिया कवरेज भी अपलोड करनी होती है।
प्रदेश कांग्रेस भवन के स्टेट कनेक्ट सेंटर और दिल्ली स्थित नेशनल वॉर रूम के जरिए संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। रोज के कामकाज के आधार पर जिलाध्यक्षों की रैंकिंग भी तैयार की जा रही है।
जिलाध्यक्षों की तिमाही समीक्षा सितंबर में प्रस्तावित थी, लेकिन राष्ट्रीय स्तर के आंदोलनों के चलते यह टल गई। अब नवंबर में समीक्षा की तैयारी है। छत्तीसगढ़ कनेक्ट सेंटर के चेयरमैन दीपक मिश्रा के मुताबिक, निष्क्रिय जिलाध्यक्षों के कामकाज की समीक्षा के बाद उन्हें सुधार का मौका देने या उनकी जगह किसी दूसरे को जिम्मेदारी सौंपने पर फैसला हो सकता है।
इसी बीच ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान के लिए छत्तीसगढ़ के नौ नेताओं को पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें फूलोदेवी नेताम, मोहन मरकाम, विकास उपाध्याय और शिवकुमार डहरिया सहित अन्य नेता शामिल हैं।
अब नजर नवंबर की समीक्षा पर है, जहां जिलाध्यक्षों के कामकाज के आधार पर संगठन में बदलाव की तस्वीर साफ हो सकती है।



