CHHATTISGARH | संविदा नौकरी गई, फिर भी मिलेगा मातृत्व लाभ!

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मातृत्व अवकाश को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया कि संविदा पर काम करने वाली महिला कर्मचारी भी मातृत्व लाभ की हकदार हैं। संविदा अवधि खत्म होने या सेवा समाप्त करने का हवाला देकर उन्हें इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
डिवीजन बेंच ने महिला डॉक्टर की याचिका खारिज करने वाले सिंगल बेंच के फैसले को रद्द कर दिया। साथ ही बर्खास्तगी नोटिस निरस्त करते हुए डॉक्टर को 180 दिन का मातृत्व अवकाश और नियमानुसार वित्तीय व अन्य लाभ देने का आदेश दिया।
मातृत्व अवकाश मांगा, मिला बर्खास्तगी नोटिस
मामला कोरबा के बिसाहूदास महंत मेमोरियल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज का है। यहां डॉ. निकिता श्रीवास्तव संविदा सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थीं। गर्भवती होने पर उन्होंने 31 जुलाई 2026 को 1 अगस्त 2026 से 28 जनवरी 2027 तक 180 दिन के सवेतन मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया था।
लेकिन कॉलेज प्रशासन ने 6 अगस्त 2026 को उन्हें एक महीने का बर्खास्तगी नोटिस जारी कर दिया। तर्क दिया गया कि संबंधित पद पर नियमित डॉक्टर की नियुक्ति हो चुकी है।
डॉ. निकिता ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। अपील के दौरान सुप्रीम कोर्ट के डॉ. कविता यादव मामले के फैसले का हवाला दिया गया, जिसमें संविदा अवधि समाप्त होने के बाद भी मातृत्व लाभ जारी रहने के सिद्धांत को स्पष्ट किया गया था।
हाईकोर्ट ने माना कि आवेदन के समय डॉ. निकिता सेवा में थीं। इसलिए उन्हें मातृत्व लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने आवेदन की तारीख से 180 दिन का अवकाश और अधिनियम के तहत मिलने वाले लाभ देने का निर्देश दिया।



