CHHATTISGARH | मेडिकल छात्रों को राहत, हॉस्टल की अनिवार्यता पर रोक!

रायपुर। छत्तीसगढ़ के निजी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को बड़ी राहत मिली है। प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति ने छात्रावास और ट्रांसपोर्ट की अनिवार्यता को लेकर कॉलेजों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कॉलेजों से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। साथ ही अंतिम निर्णय आने तक छात्रों को अंतरिम राहत दी गई है।
अब डे-स्कॉलर बनकर पढ़ सकेंगे छात्र
समिति ने स्पष्ट किया है कि छात्रावास और ट्रांसपोर्ट की सुविधा लेना छात्रों के लिए अनिवार्य नहीं है। जो विद्यार्थी हॉस्टल में नहीं रहना चाहते, उन्हें डे-स्कॉलर के रूप में पढ़ाई करने की अनुमति देने के निर्देश दिए गए हैं।
यह राहत मामले के अंतिम निराकरण तक लागू रहेगी। कॉलेजों को सात दिनों के भीतर अपना पक्ष समिति के सामने रखना होगा। अंतिम निर्णय के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
निश्चय बाजपेई ने उठाया था मुद्दा
निजी मेडिकल कॉलेजों में हॉस्टल और ट्रांसपोर्ट अनिवार्य किए जाने का मुद्दा सामाजिक कार्यकर्ता निश्चय बाजपेई ने उठाया था। उन्होंने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए छात्रों को राहत देने की मांग की थी। इस संबंध में उन्होंने प्रेसवार्ता भी की थी और पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की थी।
समिति के निर्देश से उन छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो कॉलेज के हॉस्टल में रहने के बजाय बाहर रहकर पढ़ाई करना चाहते हैं। अब सबकी नजर कॉलेजों के जवाब और समिति के अंतिम फैसले पर है।



