CHHATTISGARH | 16 लाख की संपत्ति का हिसाब नहीं मिला, अब चार्जशीट दाखिल

बिलासपुर, 6 अक्टूबर। आय से अधिक संपत्ति के मामले में बर्खास्त जीआरपी आरक्षक संतोष राठौर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सोमवार को विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) की अदालत में उसके खिलाफ चार्जशीट पेश कर दी है। जांच में राठौर की ज्ञात आय और मिली संपत्ति के बीच 16.19 लाख रुपये से ज्यादा का अंतर सामने आया है।
एसीबी के मुताबिक, संतोष राठौर ने नौकरी के दौरान कुल 46,08,341 रुपये की आय अर्जित की थी। जांच के दौरान उसके पास करीब 62,28,137 रुपये की संपत्ति पाई गई। आय और संपत्ति का मिलान करने पर 16,19,796 रुपये की अतिरिक्त संपत्ति सामने आई।
इस मामले में एसीबी ने वर्ष 2024 में राठौर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का अपराध दर्ज किया था। इसके बाद 1 दिसंबर 2024 को बिलासपुर स्थित उसके ठिकाने समेत अन्य जगहों पर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और दूसरे साक्ष्यों के आधार पर उसकी आय, खर्च और संपत्तियों का बारीकी से मिलान किया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, राठौर की संपत्ति और उससे जुड़े खर्च के दस्तावेजों की पड़ताल में ऐसी संपत्ति सामने आई, जिसका हिसाब उसकी ज्ञात आय से मेल नहीं खाता था। जांच पूरी होने के बाद अब विशेष अदालत में चार्जशीट पेश कर दी गई है।
संतोष राठौर पहले से ही एक दूसरे गंभीर मामले में जेल में बंद है। उसके खिलाफ गांजा तस्करी से जुड़े मामले में कार्रवाई हो चुकी है। आरोप है कि वह तीन अन्य आरोपियों के साथ मिलकर ट्रेन से गांजा ले जाने वाले लोगों को पकड़ने और जब्त गांजा अपने पास रखने के मामले में शामिल था।
इस मामले में आरोप है कि एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं करने के बदले आरोपियों से पैसे लिए गए और बाद में रकम आपस में बांटी गई। बिलासपुर में दर्ज इस केस में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) और 29 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। बाद में जांच एसीआईयू बिलासपुर को सौंपी गई और जांच पूरी होने के बाद एनडीपीएस विशेष अदालत में भी चालान पेश किया गया।
गांजा तस्करी मामले में आपराधिक गतिविधियों के आरोपों के चलते छत्तीसगढ़ के पुलिस अधीक्षक (रेलवे) ने 19 नवंबर 2024 को संतोष राठौर को सेवा से बर्खास्त कर दिया था।
अब आय से अधिक संपत्ति के मामले में एसीबी की चार्जशीट के बाद उसके खिलाफ एक और कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी। अदालत में पेश दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर मामले की आगे सुनवाई होगी।



