WORLD DEBT 2026 | दुनिया पर कर्ज का पहाड़, भारत की स्थिति कैसी?

नई दिल्ली। दुनिया पर कुल कर्ज का बोझ करीब 34,675 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। इसमें सिर्फ सरकारों का नहीं, बल्कि कंपनियों और परिवारों का कर्ज भी शामिल है। बढ़ते कर्ज के साथ ब्याज चुकाने का खर्च भी बढ़ रहा है, जिससे कई देशों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास योजनाओं पर खर्च करना मुश्किल हो रहा है।
फ्रांस में बढ़ी चिंता
अक्टूबर 2026 में फ्रांस के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड करीब 5 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि जर्मनी में यह 3.41 प्रतिशत थी। ज्यादा यील्ड का मतलब है कि फ्रांस के लिए नया कर्ज जुटाना अपेक्षाकृत महंगा हो रहा है। ब्रिटेन में भी सरकारी बॉन्ड की दरें ऊंची बनी हुई हैं।
किस देश पर कितना कर्ज?
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका पर करीब 3,933 लाख करोड़ रुपये, चीन पर 2,137.5 लाख करोड़ और जापान पर 826.5 लाख करोड़ रुपये का कुल कर्ज है। ब्रिटेन पर करीब 418 लाख करोड़, फ्रांस पर 399 लाख करोड़ और भारत पर करीब 323 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बताया गया है।
भारत के लिए कितनी चिंता?
भारत का कुल सरकारी कर्ज केंद्र और राज्यों को मिलाकर जीडीपी का करीब 83 प्रतिशत बताया गया है। तुलना में जापान का अनुपात करीब 199 प्रतिशत, अमेरिका का 127 प्रतिशत और फ्रांस का 118 प्रतिशत है।
हालांकि, सिर्फ कर्ज की कुल रकम से किसी देश की आर्थिक स्थिति तय नहीं होती। ब्याज चुकाने की क्षमता, आर्थिक विकास और कर्ज की लागत भी अहम हैं। भारत के कर्ज का बड़ा हिस्सा रुपये में होने से विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव का जोखिम सीमित रहता है।
IMF ने बढ़ते वैश्विक सार्वजनिक कर्ज को चुनौती बताया है। यदि ब्याज भुगतान में ज्यादा पैसा खर्च होगा, तो सरकारों के पास विकास योजनाओं के लिए कम रकम बचेगी।



