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स्वामी आत्मानन्द इंग्लिश मीडियम स्कूल में चल रहा है समर कैंप,

03.06.22, मुंगेली। समय का बच्चे सदुपयोग कर सकें और इस छुट्टी का लाभ बेफिजूल न गवाएं. इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप पहली बार जिला प्रशासन द्वारा निःशुल्क किड्स समर कैंप का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें करीब 500 से अधिक बच्चे हिस्सा लेकर अपनी कला को निखारने काम कर रहे हैं.

अलग अलग करीब 1 दर्जन विधाओं के तहत बच्चों की इच्छा के अनुसार प्रशिक्षण दक्ष प्रशिक्षकों के द्वारा दिया जा रहा है. शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जिला मुख्यालय के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल में आयोजित जिला स्तरीय किड्स समर कैम्प के प्रति बच्चों में जबरदस्त उत्साह भी नजर आ रहा है.

समर कैम्प में बच्चों द्वारा समय का सदुपयोग कर रहे हैं. उन्हें सीखने और अपनी प्रतिभा को निखारने का अच्छा अवसर मिला है, जिसका वो बखूबी लाभ उठा रहे हैं. जिले के सबसे बड़े सरकारी स्कूल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ड्रीम प्रोजेक्ट वाली स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल में 25 मई से 15 जून तक समर कैम्प का आयोजन किया जा रहा है. जहां बच्चे विभिन्न कलात्मक गतिविधियों में प्रशिक्षित हो रहे हैं.

समर कैंप प्रतिदिन सुबह 07 से 10 बजे तक एवं सायं 4 से 7 बजे तक संचालित किया जा रहा है, जिसमें बच्चों को स्पोकन इंग्लिश,केक एवं बेक,वेस्टर्न डांस,ड्रांईग एवं पेटिंग,फनी क्राफ्ट मेकिंग,योगा, ताईक्वाण्डो,बास्केट बाल, बेडमिंटन, सॉफ्ट टायस एवं क्लेपाट मेकिंग का प्रशिक्षण जिला प्रशासन की मदद से निःशुल्क दिया जा रहा है.

बच्चे भी इस कैम्प की जमकर सराहना करते हुए कहते हैं कि समर कैंप का वक्त और बढ़ना चाहिए. जहां उन्हें इस कैम्प में यही रहने का मन करता है. अन्य निजी संस्थानों में यह कैम्प लगाए जाते थे, जिससे उन्हें फीस भी देना पड़ता है. प्रशासन द्वारा यहां निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे उनको बहुत लाभ हो रहा है. साथ ही परिजनों का कहना है कि पहली बार जिला प्रशासन द्वारा यह समर कैंप का आयोजन किया जा रहा है जो काबिले तारीफ है.

किड्स समर कैंप के बारे में मुंगेली कलेक्टर डॉ गौरव सिंह ने बताया कि दर्जनों विधाओं के तहत बच्चों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें बच्चो में खासा उत्साह नजर आ रहा है. समयावधि 12 जून तक का था लेकिन अब इसे 15 जून तक के लिए किया गया है. बेहतर प्रतिफल मिल रहा है. यही वजह है कि भविष्य में स्थायी रूप से कला से जुड़े केंद्र खोलने की रूपरेखा तैयार की जा रही है

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