छत्तीसगढ़

40 गांवों के 90 जल स्रोतों में फ्लोराइड! जागरूकता की कमी से ग्रामीण नहीं कर रहे सुरक्षित पानी का उपयोग

छत्तीसगढ़ के देवभोग ब्लॉक में फ्लोराइड युक्त पानी की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। जल शक्ति...

14, March, 2025 | गरियाबंद: छत्तीसगढ़ के देवभोग ब्लॉक में फ्लोराइड युक्त पानी की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। जल शक्ति बोर्ड के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक साल के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि 94 गांवों के 175 जल स्रोतों की जांच में 40 से अधिक गांवों के 90 से ज्यादा स्रोतों में फ्लोराइड की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई है। इसके बावजूद ग्रामीण फ्लोराइड रिमूवल प्लांट के स्वच्छ पानी का उपयोग नहीं कर रहे हैं। प्रशासन अब जागरूकता अभियान चलाकर इस समस्या से निपटने की तैयारी कर रहा है।

फ्लोराइड युक्त पानी से ग्रामीणों की सेहत पर असर
देवभोग ब्लॉक में फ्लोराइड की समस्या कोई नई नहीं है। सैकड़ों ग्रामीण डेंटल और स्केलेटल फ्लोरोसिस जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं, जिससे दांत और हड्डियों पर गंभीर असर पड़ता है। सालभर पहले जल शक्ति बोर्ड के वैज्ञानिकों ने क्षेत्रीय निदेशक डॉ. प्रबीर कुमार नायक के मार्गदर्शन में इस क्षेत्र के जल स्रोतों की जांच शुरू की थी। वैज्ञानिक मुकेश आनंद और प्रमोद साहू की टीम ने अब तक 94 गांवों के 175 जल स्रोतों की विस्तृत जांच की है, जिसमें 40 से 50 गांवों के 90 से ज्यादा जल स्रोतों में फ्लोराइड की मात्रा मानक सीमा से अधिक पाई गई है।

फ्लोराइड की उच्चतम मात्रा वाले गांव
फ्लोराइड युक्त जल स्रोतों में सबसे अधिक प्रभावित नांगलदेही, सीतलीजोर, खुटगांव, करचिया, चिचिया और मूड़ागांव जैसे 17 गांव शामिल हैं। इन गांवों के 51 जल स्रोतों में अत्यधिक मात्रा में फ्लोराइड पाया गया है। यह स्थिति स्वास्थ्य के लिए बेहद चिंताजनक है, लेकिन ग्रामीणों की अविश्वास और जागरूकता की कमी के चलते वे अब भी असुरक्षित जल का ही सेवन कर रहे हैं।

6 करोड़ की लागत से लगाए गए 40 प्लांट, लेकिन उपयोग नहीं कर रहे ग्रामीण
2015 में स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए एक सर्वे में यह सामने आया था कि 1500 से ज्यादा स्कूली बच्चों के दांत पीले हो चुके हैं। इसके बाद जब जल शक्ति बोर्ड ने क्षेत्र के जल स्रोतों की जांच की, तो फ्लोराइड की उच्च मात्रा का पता चला। समस्या के समाधान के लिए 40 स्कूलों में सवा 6 करोड़ रुपये की लागत से फ्लोराइड रिमूवल प्लांट लगाए गए।

हालांकि, इन प्लांट्स का उपयोग ग्रामीणों द्वारा नहीं किया जा रहा। वजह है—जागरूकता की कमी और पारंपरिक जल स्रोतों पर निर्भरता। अब प्रशासन इन प्लांट्स को सक्रिय करने और ग्रामीणों को इसके उपयोग के प्रति जागरूक करने की योजना बना रहा है।

अभयारण्य के गांवों में सफल प्रयोग, अब अन्य गांवों में भी होगा लागू
उदंती-सीता नदी अभयारण्य क्षेत्र के 20 गांवों में भी फ्लोराइड की अधिकता पाई गई थी। वहां एक मुंबई की एनजीओ “इको सॉल्यूशंस” के इंजीनियर यतेन्द्र अग्रवाल ने “एक्टिवेटेड एल्युमिना” और “टेरेपिट फिल्टर” का प्रयोग कर सस्ते और प्रभावी समाधान तैयार किए।

इस तकनीक से महज 1000 रुपये की लागत में एक किट तैयार की गई, जो बिना बिजली के काम करती है। अब प्रभावित गांवों में इस किट को वितरित किया जाएगा। वन सुरक्षा समिति और स्थानीय कर्मियों की मदद से ग्रामीणों को इसके उपयोग की ट्रेनिंग दी जाएगी।

जल शक्ति बोर्ड की जांच में समाधान की पुष्टि
जल शक्ति बोर्ड के वैज्ञानिक मुकेश आनंद और प्रमोद साहू ने नांगलदेही गांव पहुंचकर इस किट की जांच की। प्रयोग सफल रहा, जिससे प्रशासन इसे बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना बना रहा है। वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया कि यह किफायती और प्रभावी समाधान अन्य प्रभावित गांवों में भी लागू किया जाना चाहिए।

प्रशासन का नया कदम: लोगों को किया जाएगा जागरूक
गरियाबंद कलेक्टर दीपक अग्रवाल ने बताया कि देवभोग के 40 स्कूलों में लगे फ्लोराइड रिमूवल प्लांट्स को अपग्रेड किया गया है। अब इनका नियमित मेंटेनेंस सुनिश्चित करने के लिए एक कर्मी की नियुक्ति की गई है।

इसके अलावा, प्रशासन ने ग्राम स्तर पर सभी विभागों को जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया है, ताकि ग्रामीण स्वच्छ पानी का उपयोग करें। साथ ही, बाड़ीगांव, नांगलदेही, झाखरपारा, करचिया और कैटपदर में पांच नए सामुदायिक फ्लोराइड रिमूवल प्लांट की मंजूरी भी दी गई है, जिनका जल्द क्रियान्वयन होगा।

जल संकट से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी
फ्लोराइड युक्त पानी की समस्या देवभोग ब्लॉक के सैकड़ों गांवों को प्रभावित कर रही है। सरकार और प्रशासन समाधान के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इसका सही लाभ तभी मिलेगा जब ग्रामीण जागरूक होकर सुरक्षित जल स्रोतों का उपयोग करेंगे। जागरूकता अभियान और तकनीकी समाधान से इस समस्या को दूर किया जा सकता है, ताकि ग्रामीणों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button