छत्तीसगढ़

करहल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे अखिलेश यादव, जानिए सपा के गढ़ की 5 खास बातें

लखनऊ/मैनपुरी. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव दिनों दिन रोचक होता जा रहा है. इस बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट से मैदान में उतरने के ऐलान से सियासी पारा बढ़ बया है. वह पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे और इसके साथ करहल विधानसभा सीट यूपी के साथ देशभर में चर्चा का कारण बन गयी है. यही नहीं, समाजवादी पार्टी की तरफ इस सीट के प्रभारी की भी घोषणा कर दी गयी है. इसकी जिम्‍मेदारी मैनपुरी के पूर्व सांसद तेज प्रताप यादव को दी गयी है. वैसे इस वक्‍त सपा का मैनपुरी की चार में से तीन सीटों पर कब्‍जा है. सिर्फ भोगांव ही भाजपा के पास है.

अखिलेश यादव के मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने पर कन्नौज के सांसद सुब्रत पाठक निशाना साधा है. उन्‍होंने कहा, ‘पहले वह कह रहे थे कि यूपी की किसी भी सीट से चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन अपने सांसद पिता मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र की करहल सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जो कि यादव बाहुल्‍य सीट है. यह अखिलेश का डर है कि वह कन्नौज, इटावा और आजमगढ़ को छोड़कर सुरक्षित जगह चले गए हैं, लेकिन वह वहां भी चुनाव हारेंगे और भाजपा करहल पर कब्‍जा करेगी.

यही नहीं, इसके अलावा भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि अगर अखिलेश यादव को लगता है कि मैनपुरी की सीट उनके लिए सेफ है तो उनकी यह गलतफहमी है, जिसे हम दूर कर देंगे. लोकसभा चुनाव में उनके पिता मुलायम सिंह यादव बसपा प्रमुख मायावती की व्यक्तिगत अपील करने के बाद चुनाव जीते थे. जबकि भाजपा के 50 से अधिक सांसद लाखों मतों के अंतर से 2019 में निर्वाचित हुए थे. भाजपा उनकी साइकिल को मैनपुरी में ही पंचर कर देगी, ताकि वो एक्सप्रेसवे पर चढ़कर लखनऊ ना पहुंच पाएं.

जानें 5 खास बातें

करहल विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी का सात बार कब्जा रहा है. इस विधासभा सीट से 1985 में दलित मजदूर किसान पार्टी के बाबूराम यादव, 1989 और 1991 में समाजवादी जनता पार्टी (सजपा) और 1993, 1996 में सपा के टिकट पर बाबूराम यादव विधायक निर्वाचित हुए. 2000 के उपचुनाव में सपा के अनिल यादव, 2002 में बीजेपी और 2007, 2012 और 2017 में सपा के टिकट पर सोवरन सिंह यादव विधायक चुने गए.
मैनपुरी की करहल सीट यादव बाहुल्य है और 2002 को छोड़ दिया जाए तो पिछले करीब 32 साल से इस सीट पर समाजवादी पार्टी का दबदबा रहा है. 2002 में सोवरन सिंह यादव ने यह सीट बीजेपी की झोली में डाली थी, जो बाद में सपा में शामिल हो गए.
करहल विधानसभा सीट पर यादव वोट 144123 है. जबकि 14183 वोटर मुस्लिम हैं. इसके अलावा शाक्य (34946), ठाकुर (24737), ब्राह्मण (14300), लोधी 10833) और जाटव (33688) वोटर्स का भी दबदबा है. करहल विधानसभा में कुल मतदाता 371261 हैं, जिसमें से पुरुष (201394) और महिला (169851) इसके अलावा 39 शहरी और 475 ग्रामीण पोलिंग स्टेशन हैं.
बता दें कि मैनपुरी में कुल चार विधानसभा सीटें हैं. इसमें मैनपुरी सदर, भोगांव, किशनी और करहल शामिल हैं. इस वक्‍त भोगांव पर भाजपा, तो बाकी तीनों पर सपा काबिज है. हालांकि भोगांव सीट भी लगातार पांच बार सपा के खाते में रह चुकी है.
मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट कभी अखिलेश यादव के पिता नेताजी मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक गुरु नत्थू सिंह यादव की विधानसभा सीट रही है. नत्थू सिंह यादव के बारे में ऐसा कहा जाता है कि 1957 का विधानसभा चुनाव होने करहल विधानसभा सीट से लड़ा था, लेकिन 1962 का चुनाव में उन्होंने जसवंतनगर सीट से सीट से किस्मत आजमायी थी, जिसमें नत्थू सिंह को कामयाबी हासिल हुई. साल 1967 के विधानसभा चुनाव में जसवंतनगर सीट को नत्थू सिंह ने छोड़ कर मुलायम सिंह यादव को चुनाव मैदान में उतार दिया. इस तरह पहली दफा मुलायम सिंह यादव 1967 में विधायक बन करके विधानसभा में जा पहुंचे. (news18.com)

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