छत्तीसगढ़

कांग्रेस सरकार व्यक्तिगत तानाशाही में परिवर्तित हो रही – रमन

रायपुर । छत्तीसगढ़ विधानसभा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सत्ता पक्ष पर हमला करते हुए कहा कि बहुमत से आई कांग्रेस सरकार व्यक्तिगत तानाशाही में परिवर्तित होती जा रही है। सरकार आम आदमी की न होकर एसआईटी वाली हो गई है। सरकार पर उन्होंने सीधा हमला किया और कहा कि ये सरकार एसआईटी की, एसआईटी के लिए और एसआईटी के द्वारा वाली सरकार है। नई सरकार से शिक्षाकर्मियों, अनियमित कर्मचारियों, महिलाओं को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन बजट में सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। सरकार का पूरा ध्यान केवल बदलापुर की कार्रवाइयों पर है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता को जन घोषणापत्र जारी कर कांग्रेस ने भ्रमित करने की कोशिश की। 60 दिन की सरकार में अभी से असंतोष दिखने लगा है। लोगों का यह भ्रम बजट के साथ टूट गया। 23 लाख पंजीकृत बेरोजगार टकटकी लगाकर बजट की ओर देख रहे थे, लेकिन बजट में कोई जिक्र नहीं। शिक्षाकर्मियों के आंदोलन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। कर्मचारी आंदोलन के लिए आगे आ रहे हैं। शराबबंदी को लेकर छत्तीसगढ़ की महिलाओं ने इन पर विश्वास प्रकट किया, लेकिन राज्य की आधी आबादी का विश्वास खंडित किया है। यह विश्वास टूटने जैसा है। लोकसभा चुनाव में आधी आबादी सरकार को सबक सिखाएगी।
आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया
उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी योजना नरवा, गरुवा, घुरुवा और बारी में काम कैसे होगा, इसके लिए गांव के लोग पूछा रहे हैं, पैसा कहां रखे हे संगवारी। बजट में आदिवासी उपयोजना और अनुसूचित जाति उपयोजना में प्रावधान किये गए बजट को देखकर मुझे आश्चर्य भी हुआ और दुख भी। पहली बार इतने कम बजट का प्रावधान किया गया। 15 सालों में इस क्षेत्र में सबसे कम खर्च करने वाला बजट है। ये बजट अब तक का सबसे ज्यादा घाटे वाला बजट है। आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया वाला बजट है।
गहरे आर्थिक संकट की ओर ले जाने की निशानी
उन्होंने कहा कि आज राजस्व बजट घाटा बढ़कर 6.06 फीसदी तक पहुंच गया है। हम 3 फीसदी से बढ़कर 6 फीसदी पर जा रहे हैं। यह गहरे आर्थिक संकट की ओर प्रदेश को ले जाने की निशानी है। पूंजीगत व्यय में लगातार कमी होगी और राजस्व व्यय में वृद्धि होगी, तो इससे विकास का क्रम सीधे नीचे जाएगा। कर्ज पर कर्ज लेते चले गए, तो आने वाले समय राज्य की स्थिति बेहद खराब हो जाएगी। इस साल 1 हजार 800 करोड़ कर्ज लेने की सीमा मिली थी, लेकिन घाटा बढ़ाने से अब यह सुविधा राज्य को नहीं मिलेगी। 2003 में जब राज्य की बागडोर हमने संभाली थी तब 8 हजार 121 करोड़ कर्ज हम पर था। 31 मार्च 2018 में 36 हजार 990 करोड़ का कर्ज छोड़ा। 15 सालों में सालाना 2 हजार करोड़ से कम कर्ज लिया था। नई सरकार आते ही पहले दिन ही 6 हजार करोड़ का कर्ज लिया। सरकार बनने के 15 महीने में ही 24 हजार करोड़ कर्ज हो जाएगा। हमने 15 सालों में केवल 28 हजार करोड़ का कर्ज लिया था।
फल फूल रहा ट्रांसफर उद्योग
पिछले 60 दिनों में प्रदेश के गवर्नेंस को तहस नहस कर दिया गया। हमने यूपी-बिहार के किस्से सुने थे, जहां 6 महीने में तबादले हो जाते थे। एसपी रायपुर की जब पोस्टिंग हुई, तो समाचारपत्रों में आया कि पहली बार महिला एसपी को पदस्थ किया गया, लेकिन 60 दिनों में ही बदल दिया गया। रात में 12-1 बजे आदेश निकल रहे हैं। एक आईपीएस को एसआईटी का प्रमुख बना दिया गया, उसने गलत कार्रवाई करने से मना किया तो उसे हटा दिया गया। विभाग के मंत्री को पता ही नहीं और ट्रांसफर आदेश जारी हो जाता है। उद्योग के लिए बजट में कोई पैसा तो नहीं रखा गया है, लेकिन ट्रांसफर उद्योग से यहां कोई बड़ा उद्योग नहीं है।
सरकार में बैठे मंत्री से बेहतर झीरम के बारे में कोई नहीं बता सकता
डीजीपी की स्थाई नियुक्ति दो महीने में नहीं हो पाई। यूपीएससी को तीन अधिकारियों का पैनल भेजा जाता है। पहली बार किसी कारणवश सीएस नहीं जा सके, दूसरी बार फिर मीटिंग में सीएस नहीं जा सके। नक्सल ऑपरेशन के डीजी, वर्तमान डीजीपी से तीन साल सीनियर हैं, वह किसे रिपोर्ट करेंगे? डीजीपी को हटाने की प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट ने जो गाइडलाइन तय की हुई है, उसका पालन नहीं हुआ। इससे बड़ा तमाचा नहीं हो सकता कि डीजीपी एएन उपाध्याय को हटाना पोलिटिकली मोटिवेटेड है। भ्रष्टाचार में लिप्त एक आईएएस अधिकारी को लेकर इस सरकार ने पीएम, ईडी को चिट्ठी लिखी थी, लेकिन सरकार बनने के बाद आज वो अधिकारी प्रशासनिक निर्णय में सहभागी है। झीरम मामले में उन्होंने कहा कि एनआईए के ऊपर एसआईटी बनाई गई। ठीक है, सरकार ने बनाई, लेकिन सरकार में बैठे मंत्री से बेहतर उस घटना के बारे में कोई नहीं बता सकता। आखिर उसे बैठाकर जांच क्यों नहीं की जाती। सरकार व्यक्तिगत तानाशाही में परिवर्तित हो रही – रमन
रायपुर । छत्तीसगढ़ विधानसभा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सत्ता पक्ष पर हमला करते हुए कहा कि बहुमत से आई कांग्रेस सरकार व्यक्तिगत तानाशाही में परिवर्तित होती जा रही है। सरकार आम आदमी की न होकर एसआईटी वाली हो गई है। सरकार पर उन्होंने सीधा हमला किया और कहा कि ये सरकार एसआईटी की, एसआईटी के लिए और एसआईटी के द्वारा वाली सरकार है। नई सरकार से शिक्षाकर्मियों, अनियमित कर्मचारियों, महिलाओं को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन बजट में सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। सरकार का पूरा ध्यान केवल बदलापुर की कार्रवाइयों पर है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता को जन घोषणापत्र जारी कर कांग्रेस ने भ्रमित करने की कोशिश की। 60 दिन की सरकार में अभी से असंतोष दिखने लगा है। लोगों का यह भ्रम बजट के साथ टूट गया। 23 लाख पंजीकृत बेरोजगार टकटकी लगाकर बजट की ओर देख रहे थे, लेकिन बजट में कोई जिक्र नहीं। शिक्षाकर्मियों के आंदोलन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। कर्मचारी आंदोलन के लिए आगे आ रहे हैं। शराबबंदी को लेकर छत्तीसगढ़ की महिलाओं ने इन पर विश्वास प्रकट किया, लेकिन राज्य की आधी आबादी का विश्वास खंडित किया है। यह विश्वास टूटने जैसा है। लोकसभा चुनाव में आधी आबादी सरकार को सबक सिखाएगी।
आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया
उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी योजना नरवा, गरुवा, घुरुवा और बारी में काम कैसे होगा, इसके लिए गांव के लोग पूछा रहे हैं, पैसा कहां रखे हे संगवारी। बजट में आदिवासी उपयोजना और अनुसूचित जाति उपयोजना में प्रावधान किये गए बजट को देखकर मुझे आश्चर्य भी हुआ और दुख भी। पहली बार इतने कम बजट का प्रावधान किया गया। 15 सालों में इस क्षेत्र में सबसे कम खर्च करने वाला बजट है। ये बजट अब तक का सबसे ज्यादा घाटे वाला बजट है। आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया वाला बजट है।
गहरे आर्थिक संकट की ओर ले जाने की निशानी
उन्होंने कहा कि आज राजस्व बजट घाटा बढ़कर 6.06 फीसदी तक पहुंच गया है। हम 3 फीसदी से बढ़कर 6 फीसदी पर जा रहे हैं। यह गहरे आर्थिक संकट की ओर प्रदेश को ले जाने की निशानी है। पूंजीगत व्यय में लगातार कमी होगी और राजस्व व्यय में वृद्धि होगी, तो इससे विकास का क्रम सीधे नीचे जाएगा। कर्ज पर कर्ज लेते चले गए, तो आने वाले समय राज्य की स्थिति बेहद खराब हो जाएगी। इस साल 1 हजार 800 करोड़ कर्ज लेने की सीमा मिली थी, लेकिन घाटा बढ़ाने से अब यह सुविधा राज्य को नहीं मिलेगी। 2003 में जब राज्य की बागडोर हमने संभाली थी तब 8 हजार 121 करोड़ कर्ज हम पर था। 31 मार्च 2018 में 36 हजार 990 करोड़ का कर्ज छोड़ा। 15 सालों में सालाना 2 हजार करोड़ से कम कर्ज लिया था। नई सरकार आते ही पहले दिन ही 6 हजार करोड़ का कर्ज लिया। सरकार बनने के 15 महीने में ही 24 हजार करोड़ कर्ज हो जाएगा। हमने 15 सालों में केवल 28 हजार करोड़ का कर्ज लिया था।
फल फूल रहा ट्रांसफर उद्योग
पिछले 60 दिनों में प्रदेश के गवर्नेंस को तहस नहस कर दिया गया। हमने यूपी-बिहार के किस्से सुने थे, जहां 6 महीने में तबादले हो जाते थे। एसपी रायपुर की जब पोस्टिंग हुई, तो समाचारपत्रों में आया कि पहली बार महिला एसपी को पदस्थ किया गया, लेकिन 60 दिनों में ही बदल दिया गया। रात में 12-1 बजे आदेश निकल रहे हैं। एक आईपीएस को एसआईटी का प्रमुख बना दिया गया, उसने गलत कार्रवाई करने से मना किया तो उसे हटा दिया गया। विभाग के मंत्री को पता ही नहीं और ट्रांसफर आदेश जारी हो जाता है। उद्योग के लिए बजट में कोई पैसा तो नहीं रखा गया है, लेकिन ट्रांसफर उद्योग से यहां कोई बड़ा उद्योग नहीं है।
सरकार में बैठे मंत्री से बेहतर झीरम के बारे में कोई नहीं बता सकता
डीजीपी की स्थाई नियुक्ति दो महीने में नहीं हो पाई। यूपीएससी को तीन अधिकारियों का पैनल भेजा जाता है। पहली बार किसी कारणवश सीएस नहीं जा सके, दूसरी बार फिर मीटिंग में सीएस नहीं जा सके। नक्सल ऑपरेशन के डीजी, वर्तमान डीजीपी से तीन साल सीनियर हैं, वह किसे रिपोर्ट करेंगे? डीजीपी को हटाने की प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट ने जो गाइडलाइन तय की हुई है, उसका पालन नहीं हुआ। इससे बड़ा तमाचा नहीं हो सकता कि डीजीपी एएन उपाध्याय को हटाना पोलिटिकली मोटिवेटेड है। भ्रष्टाचार में लिप्त एक आईएएस अधिकारी को लेकर इस सरकार ने पीएम, ईडी को चिट्ठी लिखी थी, लेकिन सरकार बनने के बाद आज वो अधिकारी प्रशासनिक निर्णय में सहभागी है। झीरम मामले में उन्होंने कहा कि एनआईए के ऊपर एसआईटी बनाई गई। ठीक है, सरकार ने बनाई, लेकिन सरकार में बैठे मंत्री से बेहतर उस घटना के बारे में कोई नहीं बता सकता। आखिर उसे बैठाकर जांच क्यों नहीं की जाती।

Related Articles

Back to top button