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BALOD JAMBOREE | जंबूरी या घोटाला? टेंट-टॉयलेट के नाम पर करोड़ों का खेल

 

बालोद। राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी अब विवादों के घेरे में है। आयोजन पर पांच करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच कथित लूट-खसोट की खबरें सामने आई हैं।

जानकारी के अनुसार, 1200 वीआईपी के रहने के लिए स्विस टेंट का बिल 64 लाख रुपये का जारी हुआ, जबकि 15 + 16 A +16 B नंबर के टेंट शामिल थे। वहीं, 15,000 बच्चों के लिए बनाए गए 2,000 टेंट का बिल 76 लाख रुपये का जारी हुआ।

लेकिन निरीक्षण में पाया गया कि केवल 800 टेंट लगे थे और 100 से भी कम टॉयलेट बनाए गए। ऐसे अस्थायी निर्माण कार्यों का सत्यापन दो-तीन दिन बाद करना मुश्किल है, जिससे भुगतान और वास्तविक निर्माण में भारी अंतर होने का आरोप लग रहा है।

स्थानीय सूत्रों ने बताया कि जंबूरी स्थल पर बच्चों के लिए भोजन की कमी थी, सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे और कई बच्चों का सामान चोरी हो गया। पश्चिम बंगाल के कांटिनजेंट के प्रमुख का पैर भी ऊबड़खाबड़ सड़क में गिरने से फ्रैक्चर हो गया।

आयोजन में फीस और भोजन के लिए प्रति व्यक्ति हजारों रुपये वसूले गए, लेकिन बच्चों की सुविधाओं में गंभीर कमी रही।

विशेषज्ञों और नागरिक एक्टिविस्ट का कहना है कि अगर शिक्षा विभाग और स्काउट गाइड के अधिकारियों ने भौतिक सत्यापन नहीं किया, तो करोड़ों रुपये का भुगतान पूरी तरह सवालों के घेरे में है।

पूर्व आयुक्त गजेंद्र यादव के कार्यकाल (2015-2019) में हुई तीन जंबूरी में 12 करोड़ रुपये से अधिक की कथित लूट के बाद अब यह मामला और गंभीर नजर आ रहा है।

 

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