UP BULLDOZER ACTION | यूपी सरकार पर 20 लाख का जुर्माना

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में बिना प्रक्रिया अपनाए चलाए जा रहे बुलडोजर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने अवैध ढंग से संपत्ति ध्वस्त करने के मामले में यूपी सरकार पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह फैसला संतदीन नामक व्यक्ति की याचिका पर सुनाया गया।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर ने स्पष्ट कहा कि सिर्फ विवादित आदेश को रद्द कर देना पर्याप्त नहीं है। जिस तरह राज्य अधिकारियों ने याचिकाकर्ता की संपत्ति को अवैध रूप से ढहाया, उससे हुए नुकसान की भरपाई जरूरी है। इसलिए जुर्माना लगाया जाना न्यायोचित है।
मामला 24 अप्रैल का है, जब रायबरेली जिले में अधिकारियों ने बिना पूर्व सूचना याचिकाकर्ता की भूमि पर बने ढांचे पर बुलडोजर चला दिया। बाद में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 38(5) का हवाला दिया गया, लेकिन अदालत ने पाया कि पूरी कार्रवाई एकतरफा और नियमों के खिलाफ थी।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि न तो उसे कोई नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का मौका। इसके समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के ‘डेमोलिशन ऑफ स्ट्रक्चर्स’ केस के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया गया, जिनका खुलेआम उल्लंघन हुआ।
हाईकोर्ट ने जब मूल अभिलेख और अधिकारियों के हलफनामे देखे, तो सामने आया कि सुप्रीम कोर्ट के किसी भी निर्देश का पालन नहीं किया गया। अदालत ने इसे दुर्भावना और मनमानी करार दिया।
कोर्ट ने न केवल विध्वंस आदेश को रद्द किया, बल्कि राज्य को याचिकाकर्ता को भूमि का कब्जा लौटाने और इस अवैध कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से जुर्माना वसूलने के निर्देश भी दिए।
अदालत ने अंत में कहा कि यह मामला सिर्फ कानून के शासन का नहीं, बल्कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की खुली अवहेलना का भी है।



