CG BREAKING | IAS सहित 30 अफसरों की 38 करोड़ की संपत्ति कुर्क

रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने आईएएस निरंजन दास समेत 30 आबकारी अधिकारियों की 38.21 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क कर ली है। यह कार्रवाई पीएमएलए, 2002 के तहत ईडी के रायपुर आंचलिक कार्यालय द्वारा की गई है।
ईडी के मुताबिक, निरंजन दास तत्कालीन आबकारी आयुक्त थे और इस पूरे घोटाले में उनकी अहम भूमिका सामने आई है। जांच में खुलासा हुआ है कि 2019 से 2023 के बीच आबकारी विभाग के भीतर एक समानांतर अवैध सिस्टम चलाया गया, जिससे राज्य सरकार को 2800 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ।
कुर्क की गई संपत्तियों में 78 अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिनमें आलीशान बंगले, प्रीमियम फ्लैट, व्यावसायिक दुकानें और बड़ी मात्रा में कृषि भूमि है। वहीं 197 चल संपत्तियों में करोड़ों की एफडी, बैंक खातों में जमा रकम, बीमा पॉलिसियां, इक्विटी शेयर और म्यूचुअल फंड शामिल हैं।


ईडी की जांच में सामने आया है कि वरिष्ठ अफसरों और राजनीतिक रसूख वाले लोगों से जुड़े एक आपराधिक सिंडिकेट ने आबकारी विभाग पर पूरा कब्जा कर लिया था। निरंजन दास और तत्कालीन सीएसएमसीएल सीईओ अरुण पति त्रिपाठी ने मिलकर एक समानांतर आबकारी व्यवस्था चलाई।
जांच के अनुसार, सरकारी दुकानों के जरिए अवैध देसी शराब की “पार्ट-बी स्कीम” चलाई गई। नकली होलोग्राम और गैर-कानूनी बोतलों में शराब बेचकर सीधे भट्टियों से दुकानों तक सप्लाई की जाती थी। यह सब आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ।
ईडी ने बताया कि अधिकारियों को प्रति केस 140 रुपये का तय कमीशन दिया जाता था। अकेले आईएएस निरंजन दास ने 18 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की, जिसके बदले उसे हर महीने करीब 50 लाख रुपये की रिश्वत मिलती थी। कुल मिलाकर 31 आबकारी अधिकारियों ने 89.56 करोड़ रुपये की पीओसी अर्जित की।
यह मामला रायपुर स्थित एसीबी-ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने जांच में लिया था। एजेंसी का कहना है कि यह कुर्की उन अफसरों की गहरी मिलीभगत को उजागर करती है, जिन्हें राज्य के राजस्व की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।



