SIR CONTROVERSY | वोटर लिस्ट में नाम ने फिर भड़काया खैरागढ़ राजपरिवार विवाद

खैरागढ़। छत्तीसगढ़ में खैरागढ़ राजपरिवार का पुराना विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ा है। विवाद अब तीन चरणों से गुजर चुका है, पहले लिखित शिकायत, फिर जिला प्रशासन का खंडन और अब तहसील स्तर पर औपचारिक सुनवाई।
मामले की शुरुआत 30 दिसंबर 2025 को हुई, जब रानी विभा सिंह ने खैरागढ़ कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान दिवंगत पूर्व विधायक और सांसद राजा देवव्रत सिंह की वैवाहिक स्थिति को लेकर गंभीर प्रशासनिक गलती की गई है।
रानी विभा सिंह का कहना है कि राजा देवव्रत सिंह की तलाकशुदा पूर्व पत्नी पद्मा सिंह, जो वर्तमान में नितिन पंत की पत्नी हैं। उन्हें दोबारा वोटर लिस्ट में राजा देवव्रत सिंह की पत्नी के रूप में दर्ज कर दिया गया। जबकि तलाक के बाद राजा देवव्रत सिंह का विवाह उनसे हुआ था।
शिकायत के बाद 1 जनवरी 2026 को कलेक्टर कार्यालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोपों को निराधार बताया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है।
हालांकि, मतदाता सूची में पद्मा सिंह के नाम के आगे पति के रूप में “स्व. देवव्रत सिंह” दर्ज होने पर रानी विभा सिंह ने आपत्ति जताई। इसके बाद तहसीलदार छुईखदान ने नोटिस जारी कर दोनों पक्षों को 14 जनवरी 2026 को सभी दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2003 और 2025 की मतदाता सूचियों के मिलान के आधार पर 23 दिसंबर 2025 को प्रारंभिक सूची प्रकाशित की गई थी। 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 तक दावा-आपत्ति की समयसीमा तय है, जिसके तहत दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
राजा देवव्रत सिंह के निधन के बाद से ही रानी विभा सिंह और पूर्व पत्नी पद्मा सिंह के बीच दस्तावेजों और अधिकारों को लेकर विवाद चलता आ रहा है। अब मतदाता सूची से जुड़ा यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे रहा है।
फिलहाल सबकी नजरें 14 जनवरी 2026 की तहसील स्तरीय सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि यह केवल तकनीकी आपत्ति है या किसी गंभीर प्रशासनिक चूक का मामला।



