SC STRAY DOGS HEARING | शेल्टर की कमी और ABC नियमों पर तीखी बहस

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर गुरुवार को लगातार दूसरे दिन करीब ढाई घंटे तक सुनवाई चली। सुनवाई के दौरान कुत्तों के व्यवहार, शेल्टर होम की कमी, एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियम और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर तीखी बहस हुई। कोर्ट की टिप्पणियां भी चर्चा का विषय रहीं।
जस्टिस विक्रम नाथ ने सुनवाई के दौरान कहा कि कुत्ते इंसानों के डर को पहचान लेते हैं और अक्सर डरने वाले व्यक्ति पर ही हमला करते हैं। जब एक वकील ने इस बात से असहमति जताई, तो जस्टिस नाथ ने साफ कहा “सिर मत हिलाइए, मैं यह अपने निजी अनुभव से कह रहा हूं।”
याचिकाकर्ता की ओर से वकील ने कोर्ट को बताया कि राज्यों ने जो आंकड़े दिए हैं, उनमें कहीं यह स्पष्ट नहीं है कि नगर पालिकाओं के पास कितने शेल्टर होम हैं। देश में फिलहाल सिर्फ 5 सरकारी शेल्टर हैं, जिनमें प्रत्येक की क्षमता करीब 100 कुत्तों की है। ऐसे में कोर्ट के आदेशों को लागू करने के लिए बुनियादी ढांचे की भारी कमी है।
एनिमल वेलफेयर की तरफ से पेश हुए वकील सीयू सिंह ने कुत्तों को हटाने या शेल्टर भेजने का विरोध करते हुए कहा कि इससे चूहों की आबादी बढ़ जाएगी। इस पर कोर्ट ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की “तो क्या बिल्लियां ले आएं?”
कोर्ट को यह भी बताया गया कि कुत्तों की आखिरी गिनती 2009 में हुई थी। सिर्फ दिल्ली में उस समय 5 लाख 60 हजार से ज्यादा आवारा कुत्ते थे। वकीलों ने सवाल उठाया कि जब शेल्टर की क्षमता ही नहीं है, तो इतनी बड़ी संख्या में कुत्तों को रखा कहां जाएगा।
सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने हर कुत्ते को सड़क से हटाने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक संस्थानों से हटाकर नियमों के तहत प्रबंधन करने को कहा गया है।
कोर्ट ने यह भी दोहराया कि कुत्तों के साथ मानवीय व्यवहार जरूरी है, लेकिन आम नागरिकों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मामले में अब तक पिछले 7 महीनों में 6 बार सुनवाई हो चुकी है।
अगली सुनवाई 9 जनवरी को होगी। कोर्ट ने सभी वकीलों को निर्देश दिया है कि वे टाइम्स ऑफ इंडिया में छपे लद्दाख से जुड़े आवारा कुत्तों पर आर्टिकल पढ़कर आएं, जिस पर अगली बहस होगी।



