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CG LIQUOR SCAM | शराब घोटाले की जांच तेज, ED के बाद EOW भी एक्टिव मोड में ..

 

रायपुर। रायपुर में सामने आए 3,200 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले की जांच अब और तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बाद अब राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) भी पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। झारखंड एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा शराब कारोबारी नवीन केडिया की गिरफ्तारी के बाद मामले की कई कड़ियां जुड़ती नजर आ रही हैं।

EOW अब रायपुर सेंट्रल जेल में बंद होटल कारोबारी अनवर ढेबर और तांत्रिक केके श्रीवास्तव से पूछताछ की तैयारी कर रही है। दोनों को कोर्ट में पेश करने के लिए प्रोडक्शन वारंट का आवेदन भी दाखिल कर दिया गया है। इससे पहले ED दोनों आरोपियों से लंबी पूछताछ कर चुकी है, लेकिन अब EOW आमने-सामने पूछताछ कर घोटाले से जुड़े अहम तथ्यों को खंगालना चाहती है।

EOW अधिकारियों के मुताबिक, अनवर ढेबर पर पूरे शराब सिंडिकेट को संचालित करने का आरोप है, जबकि केके श्रीवास्तव पर अवैध कमाई को छुपाने, निवेश कराने और लेन-देन मैनेज करने की भूमिका होने का संदेह है। एजेंसी का मानना है कि दोनों के बयान इस घोटाले के मास्टरमाइंड और राजनीतिक संरक्षण से जुड़े बड़े खुलासे कर सकते हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार (2019–2023) के दौरान राज्य की शराब नीति में ऐसे बदलाव किए गए, जिनसे चुनिंदा कंपनियों को सीधा फायदा पहुंचा। लाइसेंस की शर्तें इस तरह तय की गईं कि सीमित सप्लायरों को ही ठेका मिल सके।

आरोप है कि इन कंपनियों ने नोएडा की एक फर्म के जरिए नकली होलोग्राम और सील तैयार करवाईं और इन्हें सरकारी शराब दुकानों के माध्यम से बेचा गया। चूंकि इस बिक्री का डेटा सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होता था, इसलिए शराब बिना एक्साइज टैक्स के बिकती रही।

इस कथित गड़बड़ी से राज्य सरकार को करीब 2,165 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया गया है। विशेष जांच अधिकारियों का मानना है कि EOW की सक्रियता से इस बड़े घोटाले में कई नए राज सामने आ सकते हैं।

अब सबकी नजरें अनवर ढेबर और केके श्रीवास्तव की पूछताछ पर टिकी हैं, जिनसे शराब नेटवर्क, अवैध लेन-देन और राजनीतिक संरक्षण की परतें खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।

 

 

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