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RAIPUR PROTEST | आंदोलन में दो महिला रसोइयों की मौत

 

रायपुर, 28 जनवरी 2026। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मिड-डे मील योजना के तहत काम कर रही महिला रसोइयों का आंदोलन अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। धरने के दौरान दो महिला रसोइयों की मौत की खबर सामने आने के बाद प्रदेशभर में शोक और आक्रोश का माहौल है। वहीं, इस मामले में लोक शिक्षण संचालनालय ने धरना स्थल से मौतों का सीधा संबंध होने से इनकार किया है और खबरों को भ्रामक बताया है।

छत्तीसगढ़ स्कूल मिड-डे मील यूनियन के अनुसार, बेमेतरा जिले के बेरला विकासखंड के सलधा गांव स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में पदस्थ महिला रसोइया दुलारी यादव 29 दिसंबर 2025 से धरना स्थल पर बैठी थीं। 25 जनवरी को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया, बाद में निजी अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

इसी तरह बालोद जिले के डोंडी ब्लॉक अंतर्गत कुसुमकासा गांव की रहने वाली महिला रसोइया रुकमनी सिन्हा की भी मौत की खबर सामने आई। दो-दो मौतों की जानकारी मिलते ही आंदोलनरत रसोइयों में आक्रोश फैल गया। रसोइया संघ के प्रदेश अध्यक्ष रामराज्य कश्यप ने आरोप लगाया कि यह मौतें आंदोलन के दौरान हुई उपेक्षा और मानसिक तनाव का नतीजा हैं।

वहीं दूसरी ओर, लोक शिक्षण संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि तूता धरना स्थल पर बैठे किसी भी रसोइया की मौके पर मौत नहीं हुई है। विभाग के मुताबिक, बालोद जिले की रसोइया 20-21 जनवरी को धरना स्थल पर मौजूद थी, लेकिन बाद में अपने गांव लौट गई थी, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हुई। दूसरी रसोइया पहले से गंभीर बीमारी से पीड़ित थी और भिलाई के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हुई। विभाग ने कहा है कि दोनों ही मामलों का धरना स्थल या हड़ताल से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

लोक शिक्षण संचालनालय ने यह भी बताया कि हड़ताल के दौरान रसोइयों के प्रतिनिधियों से बातचीत की गई थी और शासन की ओर से मानदेय में 25 प्रतिशत वृद्धि (लगभग 500 रुपये) की कार्यवाही की जानकारी दी गई थी, साथ ही हड़ताल समाप्त करने का आग्रह किया गया था।

गौरतलब है कि महिला रसोइयों की मुख्य मांग 66 रुपये प्रतिदिन के मानदेय को बढ़ाकर 400 रुपये करने की है। आंदोलन में शामिल करीब 95 प्रतिशत महिलाएं ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से हैं। आंदोलन स्थल पर शोक सभा आयोजित कर मृतक रसोइयों को श्रद्धांजलि दी गई और परिजनों को मुआवजा देने की मांग की गई है। रसोइयों ने साफ कहा है कि जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।

 

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