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RAIPUR POST OFFICE SCAM | डाकघर में बड़ा फर्जीवाड़ा! जानिए पूरा मामला

 

रायपुर। राजधानी रायपुर के रविशंकर विश्वविद्यालय स्थित उप डाकघर में बचत योजनाओं से जुड़ा बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। मामले में छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग ने अहम फैसला सुनाते हुए पीड़ित खाताधारकों को करोड़ों रुपये के भुगतान का आदेश दिया है।

आयोग ने साफ तौर पर माना है कि यह घोटाला डाक बचत एजेंट और विभागीय कर्मचारियों, खासकर पोस्टमास्टर की मिलीभगत के बिना संभव नहीं था। आयोग के अनुसार, खातों से इस तरह अनियमित आहरण केवल अंदरूनी साठगांठ का नतीजा है।

आयोग को दी गई जानकारी के मुताबिक, परिवादी अनिल कुमार पाण्डेय, उनकी पत्नी और पुत्री ने अगस्त 2016 से नवंबर 2020 के बीच रविशंकर विश्वविद्यालय उप डाकघर में कुल 19 टर्म डिपॉजिट (TDR) और 2 आवर्ती जमा (RD) खाते खुलवाए थे। इन खातों में करीब 1.97 करोड़ रुपये की राशि जमा की गई थी।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि परिपक्व हो चुके खातों की राशि को दोबारा निवेश करने के नाम पर उनसे जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए और पोस्टमास्टर के नाम से चेक भी बनवाए गए। इसके बाद नई पासबुकें दी गईं, जिन पर डाकघर की मुहर और पोस्टमास्टर के हस्ताक्षर थे। इससे खाताधारकों को भरोसा हो गया कि उनकी रकम सुरक्षित है, लेकिन बाद में सामने आया कि एजेंट और कुछ कर्मचारियों ने बिना जानकारी के खातों से बड़ी रकम निकाल ली।

पीड़ितों ने जब इस गड़बड़ी की शिकायत डाक विभाग से की, तो न तो उन्हें संतोषजनक जवाब मिला और न ही संदिग्ध खातों को समय रहते होल्ड किया गया। इस लापरवाही से पीड़ित परिवार को भारी आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ा।

न्याय न मिलने पर पीड़ित परिवार ने छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा की पीठ ने की। दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के बाद आयोग ने माना कि पासबुक जारी करना, उस पर पोस्टमास्टर के हस्ताक्षर और खातों से राशि निकासी विभागीय कर्मचारियों की भूमिका के बिना संभव नहीं है।

आयोग का सख्त आदेश

आयोग ने परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए 18 टीडीआर खातों की परिपक्वता राशि के भुगतान का आदेश दिया है। आदेश के अनुसार, भारतीय डाक विभाग को 45 दिनों के भीतर पीड़ित परिवार को 1 करोड़ 91 लाख 39 हजार 965 रुपये का भुगतान करना होगा। इसके साथ ही 20 नवंबर 2023 से भुगतान की तिथि तक 6% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

इसके अलावा आयोग ने मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 1 लाख रुपये क्षतिपूर्ति और 15 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने के निर्देश दिए हैं।

 

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