BASTAR PANDHUM 2026 | पंडुम मंच से विकास का संदेश

रायपुर। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने ‘बस्तर पंडुम 2026’ महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और विरासत की सराहना की। मां दंतेश्वरी की पावन धरती पर उपस्थित होकर उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आना उन्हें अपने घर लौटने जैसा लगता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर के लोग जीवन को उत्सव की तरह जीते हैं और यह परंपरा पूरे देश के लिए प्रेरणा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष पंडुम में 50 हजार से अधिक लोग जनजातीय संस्कृति और जीवनशैली की झलक पेश करेंगे। उन्होंने इस आयोजन के लिए राज्य सरकार की सराहना की।
राष्ट्रपति ने बस्तर में पर्यटन की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपात, गुफाएं और पारंपरिक संस्कृति इस क्षेत्र को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बना सकती हैं। होम-स्टे जैसी पहलों को उन्होंने सकारात्मक कदम बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि चार दशकों तक माओवाद से प्रभावित रहा बस्तर अब शांति और विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने लोकतंत्र और संविधान में आस्था रखने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति ने शिक्षा को विकास की आधारशिला बताते हुए माता-पिता से बच्चों को पढ़ाने की अपील की। उन्होंने एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों और जनजातीय उत्थान योजनाओं का उल्लेख किया।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि विकास वही सफल है जो विरासत को साथ लेकर आगे बढ़े। उन्होंने युवाओं से आधुनिक विकास अपनाने के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सहेजने का आग्रह किया।



