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DEEPFAKE RULES | IT संशोधन नियम 2026 लागू, डीपफेक पर सख्ती, AI कंटेंट पर अनिवार्य लेबल

 

नई दिल्ली। भारत सरकार ने डिजिटल स्पेस को अधिक सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए आईटी संशोधन नियम, 2026 की घोषणा की है। ये नियम 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे। नए प्रावधानों का मुख्य फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार कंटेंट को रेगुलेट करना है, ताकि डीपफेक वीडियो और एआई-जनित भ्रामक सूचनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।

सरकार के अनुसार, अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डिजिटल मीडिया संस्थानों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे एआई से तैयार कंटेंट को स्पष्ट रूप से लेबल करें। साथ ही यूज़र से जुड़े सुरक्षा उपायों में पारदर्शिता भी सुनिश्चित करनी होगी। मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) द्वारा जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि जहां तकनीकी रूप से संभव हो, प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट में स्थायी मेटाडेटा या प्रोवेंस आइडेंटिफायर एम्बेड करने होंगे, जिससे उसकी उत्पत्ति का पता लगाया जा सके।

नियमों का उद्देश्य डीपफेक और एआई आधारित फर्जी सूचनाओं से बढ़ते खतरे को रोकना है। साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि इनोवेशन और यूज़र सेफ्टी के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।

नए प्रावधानों के तहत यदि किसी प्लेटफॉर्म द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और अन्य लागू आपराधिक कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सिंथेटिक तरीके से तैयार ऐसा कोई भी कंटेंट जिसमें बच्चों का यौन शोषण, बिना सहमति के निजी या अंतरंग तस्वीरें, अश्लील या पोर्नोग्राफिक सामग्री, पीडोफिलिक कंटेंट या किसी की शारीरिक व व्यक्तिगत गोपनीयता का उल्लंघन शामिल हो, उस पर सख्त कार्रवाई होगी।

इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स को कुछ मामलों में कानूनी टेकडाउन आदेश मिलने के तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी। साथ ही शिकायतों के निस्तारण और जवाब देने की समय-सीमा भी पहले के मुकाबले कम कर दी गई है।

 

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