CHHATTISGARH | 5वीं-8वीं में कोई फेल नहीं होगा

रायपुर, 15 फरवरी 2026। राज्य में 5वीं और 8वीं की केंद्रीकृत परीक्षाओं को लेकर बड़ा कन्फ्यूजन खत्म हो गया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि इस सत्र में किसी भी विद्यार्थी को अनुत्तीर्ण घोषित नहीं किया जाएगा। अगर कोई छात्र मुख्य परीक्षा में अपेक्षित अंक नहीं ला पाता है तो उसे पूरक परीक्षा का मौका मिलेगा, और उसमें भी सफल नहीं होने पर अगली कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा का उद्देश्य बच्चों की शैक्षणिक प्रगति को परखना है, न कि उन्हें फेल कर मानसिक दबाव बढ़ाना। इसी सोच के तहत यह व्यवस्था लागू की गई है।
आरटीई के बाद बदली व्यवस्था
Right to Education Act लागू होने के बाद कक्षा 1 से 8 तक पारंपरिक परीक्षा प्रणाली पर रोक थी। बाद में सीखने के स्तर पर असर की रिपोर्ट आने के बाद केंद्र ने राज्यों को 5वीं और 8वीं की परीक्षा आयोजित करने की छूट दी। राज्य सरकार ने पिछले वर्ष से फिर केंद्रीकृत परीक्षा शुरू की थी।
मार्च से शुरू होंगी परीक्षाएं
घोषित कार्यक्रम के अनुसार 5वीं की परीक्षा 16 मार्च से और 8वीं की 17 मार्च से शुरू होगी। इसमें सरकारी, अनुदान प्राप्त और छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के विद्यार्थी शामिल होंगे।
निजी स्कूलों की भागीदारी अनिवार्य
पिछले साल अधिसूचना में देरी के कारण कई निजी स्कूल अदालत पहुंचे थे और परीक्षा में भागीदारी वैकल्पिक रही थी। इस बार विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी कर सभी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों की अनिवार्य भागीदारी तय कर दी है।
शुल्क और मानदेय तय
परीक्षा संचालन और मूल्यांकन के लिए बोर्ड परीक्षा की तर्ज पर मानदेय निर्धारित किया गया है –
5वीं परीक्षा शुल्क: ₹55 प्रति छात्र
8वीं परीक्षा शुल्क: ₹60 प्रति छात्र (डीईओ कार्यालय में जमा)
5वीं कॉपी जांच: ₹2 प्रति उत्तरपुस्तिका
8वीं कॉपी जांच: ₹3 प्रति उत्तरपुस्तिका
मुख्य मूल्यांकनकर्ता: ₹100 प्रतिदिन
केन्द्राध्यक्ष: ₹150 प्रतिदिन
उत्तरपुस्तिकाओं की सुरक्षा
मूल्यांकन के बाद उत्तरपुस्तिकाओं को सीलबंद पैकेट में विकासखंड स्तर पर तीन माह तक सुरक्षित रखना होगा। इसकी जिम्मेदारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी को दी गई है। मूल्यांकन केंद्र संकुल विद्यालयों में बनाए जाएंगे।
कुल मिलाकर सरकार ने साफ कर दिया है कि परीक्षा होगी, मूल्यांकन भी होगा, लेकिन किसी बच्चे को फेल कर रोका नहीं जाएगा। अब नजर इस पर रहेगी कि यह नई व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी सुचारू रूप से लागू होती है।



