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SUPREME COURT | न्यायपालिका पर अध्याय को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

 

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ विषय शामिल किए जाने पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की, जिसमें जस्टिस जॉयमलया बागची और जस्टिस एम पंचोली भी शामिल रहे।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस प्रकार की सामग्री न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पुस्तक बाजार और सोशल मीडिया पर उपलब्ध है, तो बाद में इसे वापस लेने का क्या प्रभाव होगा।

सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आश्वासन दिया कि संबंधित अध्याय तैयार करने वाले व्यक्तियों को भविष्य में किसी मंत्रालय से नहीं जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

कोर्ट ने डिजिटल माध्यमों से विवादित सामग्री हटाने के लिए भी निर्देश दिए और कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक कार्यवाही जारी रहेगी।

इस बीच राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर न्यायपालिका के प्रति सम्मान जताया और अध्याय को अनजाने में शामिल की गई त्रुटि बताया। संस्था ने संबंधित सामग्री हटाने और अध्याय को दोबारा लिखने का निर्णय लिया है।

मामले के सामने आने के बाद शैक्षणिक और कानूनी हलकों में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

 

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