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CHHATTISGARH | सड़कों पर बचपन! भीख मांगते बच्चों का सच

 

रायपुर। सरकार योजनाएं चला रही है, दावे भी बड़े-बड़े हो रहे हैं… लेकिन जमीन पर तस्वीर कुछ और ही दिख रही है। सड़कों पर आज भी हजारों बच्चे भीख मांगते नजर आ रहे हैं।

राज्यसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक देशभर में मिले बच्चों में से सिर्फ 2653 का ही पुनर्वास हो पाया है। यानी बड़ी संख्या आज भी सड़कों पर ही है। छत्तीसगढ़ में आंकड़ा करीब 1000 बताया जा रहा है, लेकिन असल में ये संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है।

हकीकत ये है कि शहरों में अक्सर ऐसे परिवार दिख जाते हैं, जहां बड़े भीख मांगते हैं और उनके साथ बच्चे भी यही करने लगते हैं। यही वजह है कि समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही।

कुछ बच्चों को परिवार के पास भेजा गया, कुछ को आंगनबाड़ी और बाल कल्याण समिति के हवाले किया गया, जबकि करीब 635 बच्चों को स्कूल से जोड़ने की कोशिश हुई है। लेकिन ये आंकड़े जरूरत के मुकाबले बहुत कम हैं।

देश में सबसे ज्यादा भीख मांगते बच्चे उत्तर प्रदेश में मिले हैं, इसके बाद राजस्थान और बिहार का नंबर आता है। वहीं कुछ राज्यों में ये संख्या बेहद कम या शून्य बताई गई है।

अब केंद्र सरकार नई योजना लाने की तैयारी में है, ताकि इन बच्चों का बड़े स्तर पर पुनर्वास हो सके। लेकिन सवाल वही है क्या इस बार सच में बदलाव दिखेगा?

 

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