NOIDA WORKERS PROTEST | नोएडा में मजदूरों का विस्फोट

नई दिल्ली। नोएडा में पिछले तीन दिनों से सुलग रहा कर्मचारियों का गुस्सा सोमवार को फट पड़ा। जो प्रदर्शन अब तक नारेबाजी तक सीमित था, वो अचानक उग्र हो गया। सैकड़ों कर्मचारी सड़कों पर उतर आए, कई जगह जाम लगा दिया और कुछ इलाकों में तोड़फोड़ और आगजनी तक की खबरें सामने आईं।
लेकिन ये सिर्फ सैलरी बढ़ाने की लड़ाई नहीं है। कर्मचारियों का कहना है कि सालों से उनका शोषण हो रहा है। आरोप है कि उन्हें असल में 10-15 हजार रुपये मिलते हैं, लेकिन कागजों में 25 हजार दिखाया जाता है। जब जांच होती है, तो सब कुछ सही दिखा दिया जाता है।
कर्मचारियों का दर्द यहीं खत्म नहीं होता। 10-12 घंटे काम, ओवरटाइम का पैसा नहीं, छुट्टी मुश्किल से और सुविधाएं लगभग न के बराबर। खासकर महिला कर्मचारियों ने सुरक्षा और बेसिक सुविधाओं की कमी पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
इस विरोध की आग नोएडा से निकलकर फरीदाबाद तक पहुंच गई। सेक्टर-37 में भी बड़ी संख्या में कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। मदरसन कंपनी समेत कई यूनिट्स में काम बंद हो गया, जिससे प्रोडक्शन पर असर दिखने लगा है।
हालात बिगड़ते देख पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड में आ गए हैं। कई जगहों पर ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा। प्रशासन ने शांति की अपील की है, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि अब सिर्फ वादों से काम नहीं चलेगा, जमीन पर बदलाव चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्रशासन ने ओवरटाइम, सैलरी और छुट्टियों को लेकर नियम बना दिए, तो फिर गुस्सा क्यों भड़का? जवाब साफ है कर्मचारियों का भरोसा टूट चुका है। उनका कहना है कि कागजों में नियम बनते हैं, लेकिन हकीकत में कुछ नहीं बदलता।



