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COAL RAIL DELAY INDIA | कोयला रेल प्रोजेक्ट्स पीछे …

 

नई दिल्ली। भारत के सबसे बड़े कोयला उत्पादन क्षेत्रों से कोयला निकालने वाली कई महत्वपूर्ण रेल परियोजनाएं निर्धारित समय से पीछे चल रही हैं। यह जानकारी अतिरिक्त कोयला सचिव रुपिंदर ब्रार की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक से सामने आई।

बैठक में बताया गया कि स्थानीय विरोध, भूमि व वन मंजूरी में देरी, और यूटिलिटी शिफ्टिंग की समस्याओं के कारण परियोजनाओं की समय-सीमा अब वित्तीय वर्ष 2025-26 तक बढ़ा दी गई है।

प्रमुख प्रभावित प्रोजेक्ट्स –

Jharsuguda-Barpali-Sardega रेल लिंक (MCL के लिए) – डबलिंग कार्य अधूरा और बस्तियों के पास अतिक्रमण।

Chhattisgarh East Rail Ltd. Phase I – स्थानीय विरोध और वन मंजूरी में देरी।

East-West Rail Corridor – Raigarh और Korba के कोयला ब्लॉक्स से रेल हेड्स तक कनेक्शन, भूमि अधिग्रहण और मानसून बाधाओं से पिछड़ा।

Central Coalfields Ltd (CCL) परियोजनाएं – Tori-Shivpur-Kathautia और Tori-Shivpur-Hazaribagh-लक्ष्य मार्च 2025 से बढ़ाकर मार्च 2026 किया गया।

अधिकारियों ने कहा कि कई क्षेत्रों में स्थानीय विरोध और पुनर्वास विवाद प्रगति को रोक रहे हैं। भूमि अधिग्रहण और वन मंजूरी के मामले जिला स्तर पर तेजी से निपटाने पर जोर दिया गया है।

कोयला आपूर्ति पर असर –

इन रुकावटों से कोयला लॉजिस्टिक प्रभावित हो सकती है। भारत में कोयला उत्पादन बढ़ रहा है, लेकिन इन रेल कॉरिडोर के बिना स्मूद आपूर्ति नहीं हो पाएगी। ये लाइनें MCL, SECL और ECL के थर्मल पावर प्लांट्स तक कोयला पहुंचाने के लिए रणनीतिक हैं।

मंत्रालय का निर्देश –

रुपिंदर ब्रार ने प्रोजेक्ट एजेंसियों को कहा कि वे राज्य प्रशासन और स्थानीय समुदायों के साथ समन्वय बढ़ाएं, विरोध कम करें और क्षतिपूर्ति विवादों को जल्दी सुलझाएं। वन और राजस्व संबंधी लंबित मुद्दों को प्राथमिकता से हल करने पर जोर दिया गया।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ये रेल कॉरिडोर राष्ट्रीय कोयला उत्पादन लक्ष्य 1.5 बिलियन टन और नए व विस्तारित खानों से कोयला की प्रभावी आपूर्ति के लिए रणनीतिक महत्व रखते हैं।

 

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