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INDIA DELTA SINKING | डेल्टा डूबे तो खतरे में करोड़ों ..

 

नई दिल्ली। एक नई वैश्विक स्टडी में सामने आया है कि भारत के कई प्रमुख नदी डेल्टा क्षेत्र तेजी से डूब रहे हैं और यह गति समुद्र के बढ़ते जल स्तर से भी अधिक है। गंगा-ब्रह्मपुत्र, महानदी, ब्राह्मणी और गोदावरी जैसे बड़े डेल्टा सबसे ज्यादा प्रभावित बताए गए हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार अत्यधिक भूजल निकासी इस संकट की सबसे बड़ी वजह बन रही है, जिससे इन इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों पर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल नेचर में प्रकाशित हुआ है, जिसमें दुनिया के 29 देशों के 40 बड़े डेल्टाओं का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक आधे से ज्यादा डेल्टा हर साल 3 मिलीमीटर से अधिक की दर से डूब रहे हैं, जबकि 13 डेल्टाओं में यह दर समुद्र स्तर के बढ़ने की औसत गति 4 मिलीमीटर प्रति वर्ष से भी ज्यादा है।

भारत में ब्राह्मणी और महानदी डेल्टा सबसे तेजी से डूबते क्षेत्रों में शामिल हैं। ब्राह्मणी डेल्टा के करीब 77 प्रतिशत और महानदी डेल्टा के लगभग 69 प्रतिशत इलाके प्रभावित बताए गए हैं। वहीं गंगा-ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कावेरी और कबनी डेल्टाओं में भी 90 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में भूमि धंसने की समस्या देखी गई है।

डेल्टा वे क्षेत्र होते हैं जहां नदियां समुद्र में मिलती हैं। ये दुनिया की कुल भूमि का केवल 1 प्रतिशत हिस्सा हैं, लेकिन यहां करीब 6 प्रतिशत वैश्विक आबादी रहती है। भारत में करोड़ों लोग इन्हीं डेल्टा क्षेत्रों पर कृषि, मछली पालन, व्यापार और बंदरगाह गतिविधियों के लिए निर्भर हैं। चूंकि ये इलाके समुद्र तल से केवल दो मीटर तक ऊंचे होते हैं, इसलिए इन्हें अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।

स्टडी में बताया गया है कि मानवीय गतिविधियां डेल्टा डूबने का प्रमुख कारण बन रही हैं। विशेष रूप से भूजल का अत्यधिक दोहन जमीन के नीचे की मिट्टी को संकुचित कर रहा है, जिससे सतह नीचे धंसती जा रही है। इसके अलावा नदियों पर बने बांध और बैराज गाद के प्राकृतिक प्रवाह को रोक देते हैं, जो पहले डेल्टा क्षेत्रों को ऊंचा बनाए रखने में मदद करता था।

जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र स्तर में वृद्धि इस समस्या को और गंभीर बना रही है। रिपोर्ट के अनुसार भारत के ब्राह्मणी, महानदी, गंगा-ब्रह्मपुत्र और गोदावरी जैसे कई डेल्टाओं में भूमि धंसने की रफ्तार समुद्र स्तर बढ़ने से भी तेज है, जिससे बाढ़ का खतरा बिना किसी बड़े समुद्री बदलाव के भी बढ़ रहा है।

अध्ययन के मुताबिक इन डेल्टा क्षेत्रों में रहने वाले करीब 23 करोड़ से अधिक लोग सीधे तौर पर बाढ़ के जोखिम में हैं। कोलकाता जैसे बड़े शहरों में भी जमीन के धीरे-धीरे धंसने के संकेत मिले हैं, जिसका असर खेती, पेयजल स्रोतों, पर्यावरण और बुनियादी ढांचे पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे ज्यादा असर गरीब और ग्रामीण समुदायों पर पड़ेगा, जो निचले इलाकों में रहते हैं और जिनके पास पलायन के सीमित विकल्प हैं।

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि भूजल निकासी पर नियंत्रण नहीं किया गया, नदियों की गाद को डेल्टा तक पहुंचने नहीं दिया गया और समय रहते अनुकूलन योजनाएं नहीं बनाई गईं, तो आने वाले दशकों में बाढ़, भूमि क्षरण और विस्थापन की समस्या और गंभीर हो सकती है।

 

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