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RAIPUR COURT | ACB अफसरों पर परिवाद खारिज, कोर्ट ने कहा – नहीं है अधिकार क्षेत्र

 

रायपुर। रायपुर कोर्ट ने ACB चीफ अमरेश मिश्रा, एडिशनल एसपी चंद्रेश ठाकुर और डीएसपी राहुल शर्मा के विरुद्ध दायर परिवाद को प्रारंभिक स्तर पर निरस्त कर दिया है। कोर्ट का यह फैसला परिवाद के गुण-दोष पर नहीं, बल्कि क्षेत्राधिकार (जूरिस्डिक्शन) के आधार पर आया है।

यह आदेश न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आकांक्षा बेक ने जारी किया। परिवाद में आरोप लगाया गया था कि एसीबी के अफसरों ने कथित रूप से कूटरचना कर अदालत के समक्ष धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराए।

कोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि धारा 183 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत अभिलिखित कथनों पर विचार उसी न्यायालय द्वारा किया जाना है, जहां वे साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं। वर्तमान न्यायालय को इस मामले में विचारण का अधिकार प्राप्त नहीं है, इसलिए परिवाद निरस्त किया जाता है।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि जब परिवाद इस न्यायालय के समक्ष प्रचलनशील नहीं है, तो लंबित आवेदन प्रारंभिक साक्ष्य और धारा 94 BNSS से जुड़े आवेदनों पर भी विचार नहीं किया जा सकता।

क्यों दायर हुआ था परिवाद?

परिवाद में ACB चीफ अमरेश मिश्रा, एडिशनल एसपी चंद्रेश ठाकुर और डीएसपी राहुल शर्मा पर आरोप लगाया गया था कि वे कथित रूप से कूटरचना कर कोर्ट में बयान दर्ज करा रहे हैं। परिवादी ने अपने आरोपों के समर्थन में कई तथ्य और तर्क प्रस्तुत किए थे।

कोर्ट में हुई तीखी बहस

परिवाद की स्वीकार्यता को लेकर कोर्ट में परिवादी पक्ष और राज्य सरकार (बचाव पक्ष) के बीच जोरदार बहस हुई। एसीबी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रवि शर्मा पेश हुए, जबकि परिवादी की ओर से अधिवक्ता फैजल रिजवी ने पक्ष रखा।

रवि शर्मा ने दलील दी कि यह मामला क्षेत्राधिकार से जुड़ा है और न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत इस परिवाद की सुनवाई नहीं कर सकती। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारी शासकीय कर्तव्य का निर्वहन कर रहे थे, इसलिए उन्हें विधि द्वारा प्रदत्त संरक्षण प्राप्त है।

वहीं, फैजल रिजवी ने तर्क दिया कि यह अदालत मामले की सुनवाई कर सकती है, क्योंकि परिवाद किसी न्यायालय के विरुद्ध नहीं बल्कि कथित अपराध की सूचना है। उन्होंने कहा कि संविधान हर नागरिक को अपराध की सूचना देने का अधिकार देता है।

रिविजन की तैयारी

अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अधिवक्ता फैजल रिजवी ने कहा कि इस आदेश के खिलाफ रिविजन दायर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “कानूनी लड़ाई जारी रहेगी और परिवाद में लगाए गए आरोप तथ्य आधारित हैं।”

फिलहाल, कोर्ट के आदेश के बाद मामला नए कानूनी चरण में प्रवेश कर गया है और अब उच्चतर अदालत में चुनौती की तैयारी की जा रही है।

 

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