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CHHATTISGARH | नशे पर साय सरकार का बड़ा वार!

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बढ़ते नशे के कारोबार को रोकने के लिए सरकार अब सख्त मोड में नजर आ रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत विशेष अभियान समूह (SOG) और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) का गठन किया जा रहा है।

सरकार का साफ संदेश है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को अब किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पिछले कुछ वर्षों में देश के अन्य हिस्सों की तरह छत्तीसगढ़ में भी गांजा, हेरोइन, अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थों का नेटवर्क तेजी से फैलने की चिंता सामने आई है।

आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में लाखों लोग नशे की गिरफ्त में हो सकते हैं। एक सर्वे के अनुसार राज्य में करीब 1.5 से 2 लाख लोग अफीम और इंजेक्टेबल ड्रग्स का सेवन कर रहे हैं, जबकि 3.8 से 4 लाख लोग गांजा का उपयोग करते हैं। वहीं 10 से 17 साल के 40 हजार से ज्यादा किशोर इनहेलेंट और कफ सिरप जैसे नशे के आदी हो रहे हैं।

सरकार का दावा है कि नशे के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। पिछले 13 महीनों में 1,434 मामले दर्ज किए गए और 2,599 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान 20 हजार किलो से ज्यादा गांजा और लाखों नशीली गोलियां बरामद की गईं।

साल 2025 में भी ड्रग्स के खिलाफ अभियान तेज रहा। इस दौरान 1,288 मामले दर्ज हुए और 2,342 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने हजारों किलो गांजा, हेरोइन, अफीम, डोडा समेत बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त किए।

2026 की शुरुआत में भी कार्रवाई जारी है। जनवरी तक 146 मामले दर्ज किए गए और 257 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इस दौरान हजारों किलो गांजा और अन्य नशीले पदार्थ बरामद किए हैं।

सरकार ने अब इस नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए दो बड़े कदम उठाए हैं। पहला, पुलिस मुख्यालय के अंतर्गत विशेष अभियान समूह यानी SOG का गठन किया गया है, जो आतंकवाद और संगठित अपराधों से निपटेगा। दूसरा, 10 जिलों में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स बनाई जा रही है, जिसके लिए 100 नए पदों को मंजूरी दी गई है।

साथ ही NDPS कानून के तहत नशे के कारोबार से जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर भी कार्रवाई की जा रही है। 2025 में 16 आरोपियों की करीब 13.29 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या फ्रीज की गई है।

नशे के खिलाफ लड़ाई में केवल पुलिस ही नहीं बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी मानी जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने “मानस” नाम की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1933 भी शुरू की है, जहां आम लोग नशे से जुड़ी गतिविधियों की सूचना दे सकते हैं।

 

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