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CHHATTISGARH | लोहा चोरी कांड के बीच बीएसपी में बड़ा प्रशासनिक बदलाव

 

भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र में सामने आए करोड़ों रुपये के लोहा चोरी कांड के बीच एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव चर्चा का विषय बन गया है। भिलाई स्थित सीआईएसएफ इकाई के डीआईजी नागेंद्र नाथ त्रिपाठी का दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताया जा रहा है, लेकिन इसे बहुचर्चित लोहा चोरी मामले से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात संयंत्रों में शामिल बीएसपी की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआईएसएफ के पास है। ऐसे में भारी मात्रा में लोहे और स्क्रैप की चोरी के खुलासे ने सुरक्षा तंत्र और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच में सामने आया है कि संयंत्र परिसर से लंबे समय से संगठित तरीके से लोहा और स्क्रैप बाहर निकाला जा रहा था। इस पूरे नेटवर्क में बिचौलियों, ठेकेदारों और कथित अंदरूनी लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा है।

मामला सामने आने के बाद बीएसपी प्रबंधन, पुलिस और अन्य एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश-निकास रिकॉर्ड, परिवहन दस्तावेज और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री सुरक्षा घेरे को पार कर बाहर कैसे पहुंची।

इसी बीच डीआईजी नागेंद्र नाथ त्रिपाठी के दिल्ली तबादले ने चर्चाओं को और तेज कर दिया है। हालांकि विभाग इसे सामान्य फेरबदल बता रहा है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान में हुई सुरक्षा चूक के बाद शीर्ष स्तर पर समीक्षा और बदलाव स्वाभाविक प्रक्रिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि बीएसपी की पूरी सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और जवाबदेही की व्यापक समीक्षा की मांग भी कर रहा है।

 

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