CHHATTISGARH | बाघ शिकार और तस्करी केस की अब CBI जांच, छत्तीसगढ़ सरकार ने दी मंजूरी

रायपुर। छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा से जुड़े बाघ शिकार और वन्यजीव तस्करी के मामलों की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) करेगा। राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंपने के लिए सहमति दे दी है। इससे मामले से जुड़े संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच का रास्ता साफ हो गया है।
तीन बाघों की खाल बरामद होने से शुरू हुआ मामला
29 जून 2026 को कांकेर जिले के पश्चिम भानुप्रतापपुर वनमंडल में वन अपराध प्रकरण क्रमांक 390/09 दर्ज हुआ था। कार्रवाई के दौरान दो बाघों की खाल और 13 मूंछें बरामद की गई थीं। इसके बाद इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में तलाशी के दौरान 5 जुलाई को तीसरी बाघ की खाल बरामद हुई और 22108/01 प्रकरण दर्ज किया गया।
अब तक 9 आरोपी गिरफ्तार
मामले में अब तक 9 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच के दौरान शिकार में इस्तेमाल होने वाले फंदे, चाकू, 12 पंजे और चार कैनाइन दांत भी बरामद किए गए। अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में महाराष्ट्र से जुड़े लोग भी शामिल हैं। एक आरोपी के महाराष्ट्र पुलिस की विशेष शाखा से जुड़े होने और दूसरे के पुलिस मुखबिर होने की जानकारी भी सामने आई है।
अंतरराज्यीय नेटवर्क की होगी पड़ताल
वन विभाग ने मामले की गंभीरता और दूसरे राज्यों से जुड़े संभावित नेटवर्क को देखते हुए CBI जांच की सिफारिश की थी। अब राज्य सरकार की सहमति के बाद जांच केंद्रीय एजेंसी के पास जाने का रास्ता खुल गया है।
CBI जांच में बाघों के शिकार, खाल और अंगों की तस्करी तथा इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। मामले में लापरवाही के आरोप में तीन वनकर्मियों को निलंबित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।



