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HIGH COURT ORDER | 2011 की भर्ती में 67 सब-इंजीनियरों की नियुक्ति रद्द

 

बिलासपुर, 3 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की वर्ष 2011 की सब-इंजीनियर (सिविल) भर्ती प्रक्रिया पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने भर्ती में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद 67 सब-इंजीनियरों की नियुक्तियों को अवैध घोषित कर रद्द करने का आदेश दिया है।

यह फैसला मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि जिन अभ्यर्थियों के पास आवेदन की अंतिम तिथि तक निर्धारित शैक्षणिक योग्यता नहीं थी, उनकी नियुक्ति कानूनन मान्य नहीं हो सकती। ऐसी नियुक्तियों को शुरू से ही शून्य यानी Void ab initio माना जाएगा।

हाई कोर्ट ने कहा कि किसी भी सरकारी भर्ती में विज्ञापन में तय पात्रता शर्तों का सख्ती से पालन जरूरी है। नियमों में किसी भी तरह की छूट या लापरवाही न सिर्फ कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का भी हनन होता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बाद में योग्यता हासिल कर लेने से कोई उम्मीदवार पात्र नहीं बन सकता, अगर वह अंतिम तिथि तक शर्तें पूरी नहीं करता था।

सुनवाई के दौरान सामने आया कि 2011 की इस भर्ती प्रक्रिया में कई ऐसे उम्मीदवारों को नियुक्त कर दिया गया, जिन्होंने तय समयसीमा तक आवश्यक शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं की थी। इसके बावजूद उन्हें चयनित कर सेवा में शामिल किया गया, जिसे कोर्ट ने भर्ती नियमों का खुला उल्लंघन और प्रशासनिक मनमानी बताया।

कोर्ट ने कहा कि ऐसी अवैध नियुक्तियों को बनाए रखना न्यायसंगत नहीं होगा, क्योंकि इससे उन योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ है, जो सभी नियमों का पालन करने के बावजूद चयन से वंचित रह गए। एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को नजरअंदाज कर की गई नियुक्तियां कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकतीं।

इस फैसले के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की 2011 की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। साथ ही यह आदेश भविष्य की सभी सरकारी भर्तियों के लिए एक साफ संदेश भी देता है कि नियमों से किसी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस फैसले से राज्य में सरकारी नियुक्तियों की पारदर्शिता और जवाबदेही और मजबूत होगी। माना जा रहा है कि इसके बाद अन्य विभागों की पुरानी और विवादित भर्तियों की समीक्षा की मांग भी तेज हो सकती है।

 

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