छत्तीसगढ़

दवा लिए बिना लौट रहे मरीज, जनऔषधि की दवाएं भी नहीं आ रही दिल्ली से

बिलासपुर। सिम्स में वर्ष के अंतिम माह में हमेशा की तरह दवाओं की कमी होने लगी है। जबकि शासन ने पहले ही जरूरी स्टाक रखने के निर्देश अस्पताल के प्रबंधकों को दिए थे। जिस पर ध्यान नहीं दिया गया अब यहां मरीजों का उपचार तो हो रहा है लेकिन दवा नहीं मिल पा रही है। सिम्स की ओपीडी में रोजाना औसतन 12०० मरीज पहुंचते हैं। ऐसे स्थिती में बड़े पैमाने पर दवाओं की आवश्यकता पड़ती है। मौजूदा स्थिति में मरीज को उपचार के बाद दवा नहीं मिल रही है। यदि डॉक्टर चार प्रकार की दवा लिखते हैं तो उनमें से एक दो ही अस्पताल से मिल पाती है। ऐसी स्थिति अब मार्च भर बनी रहेगी। नया वित्तीय वर्ष शुरू होने के बाद अप्रैल में अस्पताल को नए बजट मिलने के बाद ही दवाओं की खरीदी की जाएगी। इसके बाद भी स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है। तब तक दवाओं कमी का खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़ेगा।
क्या कहता है प्रबंधन
इस मामले में सिम्स प्रबंधन का कहना है कि बजट पास होने के बाद सालभर के लिए दवाओं का स्टाक किया जाता है। इसके बाद साल के अंत में कुछ दिनों के लिए इस तरह की समस्या हो जाती है। अस्पताल में हो रही दवा की कमी के लिए अन्य मदों से कुछ मात्रा में समान्य बीमारी के दवा की खरीदी का प्रस्ताव बनाया गया है। अस्पताल में पूर्ण स्टॉक के लिए अपैल तक इंतजार करना पड़ेगा।
जन औषधि में दवाएं गायब
सिम्स के दवा सेंटर के अलावा जन औषधि केंद्र में भी दवाओं की कमी बनी गई है। ऐसे में मरीजों को सस्ते दर पर दवा नहीं मिल रही है। यहां के कर्मचारी की माने तो दवा की सप्लाई दिल्ली से की जाती है। जहां से दवा कम मात्रा में स्पलाई की जा रही है। मजबूरी में उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से ब्रांडेड दवा खरीदनी पड़ती है, जिसकी कीमत कई गुना अधिक होती है।

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