छत्तीसगढ़

कांग्रेस की पहली सूची के पांच दमदार उम्मीदवारों को मिल रहे जनसमर्थन से भाजपा घबराई

घबराहट और बौखलाहट में भाजपा ने लिया सभी 11 उम्मीदवार बदलने का फैसला

रायपुर। भाजपा द्वारा अपने 10 वर्तमान लोकसभा सदस्यों सहित सभी 11 लोकसभा प्रत्याशियों का टिकट काटने के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री और कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि कांग्रेस की पहली सूची के पांच दमदार उम्मीदवारों को मिल रहे जनसमर्थन से भाजपा घबराई है। चौकीदार डर गया है, घबरा गया है, बौखला भी गया है। घबराहट और बौखलाहट में भाजपा ने सभी 11 उम्मीदवार बदलने का फैसला लिया है। भाजपा आसमान से तोड़कर लायें या पाताल से फोड़कर निकाले, भाजपा को सीट जीतने वाले उम्मीदवार नहीं मिल पायेंगें। कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार के छत्तीसगढ़ में 60 दिनों में किये गये जनहितकारी फैसलों और अच्छे काम के कारण और केंद्र की मोदी सरकार के प्रति समाज के हर वर्ग में गहरी नाराजगी के कारण छत्तीसगढ़ की सभी 11 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस को जीत मिलेगी ।
उन्होंने कहा है कि नोटबंदी जीएसटी 10 करोड़ रोजगार 100 दिन में काला धन की वापसी मजबूत लोकपाल भ्रष्टाचार की समाप्ति जैसे वादों को पूरा न कर पाने के कारण भाजपा की मोदी सरकार के प्रति जनता का गुस्सा इन 11 उम्मीदवारों के बदलने से शांत नहीं होगा। अब मोदी सरकार की रवानगी तय है।
उन्होंने कहा है कि विगत 15 वर्षों में जिस तरह से भाजपा के लोकसभा सदस्यों ने छत्तीसगढ़ के हितों और हकों की उपेक्षा की और लोकसभा में कभी छत्तीसगढ़ वासियों की कोई आवाज नहीं उठाई उसके कारण पूरे प्रदेश में भाजपा के सांसदों के प्रति गहरी नाराजगी व्याप्त है।
श्री त्रिवेदी ने कहा है कि एंटी इनकंबेंसी से बचने के लिये उम्मीदवार बदलने की भाजपा की रणनीति विधानसभा चुनाव की ही तरह विफल होगी। भारतीय जनता पार्टी ने एंटी इनकंबेंसी से बचने के लिए भले ही मजबूरी में ही सही यह फैसला लिया है लेकिन इससे भाजपा को कोई चुनावी लाभ नहीं मिल पायेगा। विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने अपने विधायकों की टिकट काटने का यह फार्मूला आजमाया था लेकिन इस फार्मूले के तहत भारतीय जनता पार्टी के जिन जिन नए प्रत्याशियों को मौका दिया गया उनको भी हार मिली लोकसभा चुनाव में भी यही दोहराया जाएगा और सभी 11 सीटों पर जनता की गहरी नाराजगी के चलते भाजपा उम्मीदवारों को हार का मुंह देखना पड़ेगा।

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