CHHATTISGARH | मेंटल हॉस्पिटल पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को 24 मार्च तक देना होगा जवाब

रायपुर। बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ के इकलौते शासकीय मानसिक अस्पताल को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। संविदा डॉक्टरों के सहारे चल रहे अस्पताल और अधूरी जानकारी पर कोर्ट ने साफ कहा कि अस्थायी जुगाड़ नहीं, स्थायी समाधान चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव से नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया है कि 24 मार्च तक नया शपथपत्र पेश किया जाए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि मानसिक अस्पताल में नियमित भर्तियां आखिर कब तक पूरी होंगी।
यह मामला साकरी, बिलासपुर स्थित मानसिक अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। इससे पहले कोर्ट ने एक कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर अस्पताल का निरीक्षण कराया था, जिसकी रिपोर्ट में डॉक्टरों की कमी, स्टाफ की भारी कमी और साफ-सफाई की लचर व्यवस्था उजागर हुई थी।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से जवाब मांगा था। सरकार की ओर से बताया गया कि सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए दो एमडी (मनोचिकित्सा) डॉक्टरों को दो साल के लिए संविदा पर नियुक्त किया गया है, जिन्होंने जनवरी के मध्य से काम भी शुरू कर दिया है।
सरकार ने यह भी बताया कि पैथोलॉजी विशेषज्ञ की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर की भर्ती लोक सेवा आयोग में लंबित है। वहीं, वार्ड बॉय और वार्ड अटेंडेंट की परीक्षा पूरी हो चुकी है और दस्तावेज सत्यापन के बाद नियुक्ति आदेश जारी होंगे।
हालांकि, अमीकस क्यूरी ने कोर्ट में साफ कहा कि स्वास्थ्य सचिव का शपथपत्र कई अहम सवालों पर चुप है। इसमें यह नहीं बताया गया कि नए मनोचिकित्सकों की भर्ती कब शुरू होगी, विज्ञापन दोबारा कब निकलेगा, साक्षात्कार की तारीख क्या होगी और भर्ती में आ रही दिक्कतों का समाधान क्या है।
सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि अप्रैल 2025 में निकले विज्ञापन के बाद सभी अभ्यर्थी या तो अनुपस्थित रहे या अयोग्य पाए गए, जिस वजह से भर्ती प्रक्रिया अधर में लटक गई।



