BHILAI POLITICAL BATTLE | तीन निगमों में चुनावी जंग, किसकी बढ़ेगी मुश्किल?

भिलाई, 12 अक्टूबर 2026। भिलाई, रिसाली और भिलाई-चरोदा नगर निगम में दिसंबर में प्रस्तावित चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज होने लगी है। तीनों निगमों में फिलहाल कांग्रेस का कब्जा है, इसलिए इस बार पार्टी के सामने अपनी सत्ता बचाने की चुनौती होगी। वहीं भाजपा की नजर निगमों में वापसी और अपना जनाधार मजबूत करने पर है।
भिलाई नगर निगम में महापौर नीरज पाल, रिसाली में शशि सिन्हा और भिलाई-चरोदा में निर्मल कोसरे के नेतृत्व में कांग्रेस सत्ता में है। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने तीनों जगह भाजपा को शिकस्त दी थी। अब दोनों दल वार्ड स्तर पर अपनी तैयारियां तेज करने में जुटे हैं।
कांग्रेस को विकास पर भरोसा
कांग्रेस सड़क, पानी, उद्यान विकास, अमृत मिशन और आवास योजनाओं से जुड़े कामों को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। पार्टी वार्डवार बूथ कमेटियों को सक्रिय करने के साथ स्थानीय समीकरण और जातिगत संतुलन के आधार पर टिकट तय करने पर भी ध्यान देगी।
भाजपा किन मुद्दों पर घेरेगी?
भाजपा भ्रष्टाचार, जल संकट, खराब सड़कों और टैक्स वृद्धि जैसे मुद्दों को उठाकर कांग्रेस को घेरने की रणनीति बना रही है। पार्टी ने वार्ड स्तर पर सर्वे और संभावित प्रत्याशियों के चयन की तैयारी शुरू कर दी है। महिला और युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने के साथ प्रदेश में भाजपा सरकार होने का फायदा उठाने की कोशिश भी होगी।
2028 से पहले अहम मुकाबला
राजनीतिक नजरिए से भिलाई की लड़ाई सबसे दिलचस्प मानी जा रही है। रिसाली में सत्ता विरोधी माहौल और भिलाई-चरोदा में स्थानीय मुद्दे चुनाव की दिशा तय कर सकते हैं। दिसंबर का यह मुकाबला दोनों दलों के लिए 2028 विधानसभा चुनाव से पहले अपनी ताकत परखने का मौका होगा।



