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CG HIGH COURT ORDER | अब लेक्चरर नहीं बन सकेंगे BEO!

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में प्रभार नियुक्तियों को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुना दिया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि टीचिंग कैडर के शिक्षक और व्याख्याता सीधे प्रशासनिक पदों का जिम्मा नहीं संभाल सकते।

कोर्ट ने प्रतापपुर के एक लेक्चरर को प्रभारी BEO बनाने वाले सरकारी आदेश को रद्द करते हुए कहा कि यह शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) और सेवा नियमों के खिलाफ है। अदालत ने माना कि शिक्षकों का काम पढ़ाना है, प्रशासनिक कुर्सियां संभालना नहीं।

मामला सूरजपुर जिले के प्रतापपुर का है, जहां 2015 से ABEO के पद पर कार्यरत मुन्नू सिंह धुर्वे से जून 2026 में प्रभार वापस लेकर एक व्याख्याता को BEO बना दिया गया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

सुनवाई के दौरान यह दलील दी गई कि संबंधित क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र है और वहां केवल T कैडर के अधिकारी ही पदस्थ हो सकते हैं। लेकिन कोर्ट ने कहा कि असली मुद्दा E और T कैडर नहीं, बल्कि यह है कि क्या किसी टीचिंग कैडर के कर्मचारी को प्रशासनिक पद दिया जा सकता है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि RTE एक्ट की धारा 27 शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से दूर रखने की बात कहती है। चुनाव और जनगणना जैसी विशेष परिस्थितियों को छोड़कर उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती।

कोर्ट ने यह भी कहा कि BEO पद के लिए तय फीडर चैनल में ABEO और हाई स्कूल प्राचार्य शामिल हैं, जबकि एक व्याख्याता इस श्रेणी में आता ही नहीं। ऐसे में उसकी नियुक्ति पूरी तरह मनमानी और कानून के विपरीत है।

इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग में प्रभार नियुक्तियों की व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है और भविष्य में ऐसे आदेशों पर रोक लग सकती है।

 

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