chhattisgarhhindi newsछत्तीसगढ़

CGPSC SCAM | 60 लाख में सीट, पेपर से चयन तक पूरा खेल?

 

रायपुर। CGPSC राज्य सेवा परीक्षा-2021 में कथित पेपर लीक और चयन में गड़बड़ी को लेकर ED ने पहली अभियोजन शिकायत यानी चार्जशीट दाखिल की है। 99 पेज की शिकायत के साथ करीब 3,700 पेज के दस्तावेज लगाए गए हैं। इसमें पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत सात लोगों को आरोपी बनाया गया है।

आरोपियों में तत्कालीन CMO के OSD चेतन बोरघारिया, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर, डॉ. विकास चंद्राकर, उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और कारोबारी श्रवण गोयल शामिल हैं। ED के मुताबिक उत्कर्ष और विकास चंद्राकर ने अभ्यर्थियों को कथित तौर पर परीक्षा के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन में मदद का भरोसा दिया था।

60-65 लाख में पोस्ट का कथित सौदा

ED की जांच के मुताबिक, अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 3 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई गई। आपके दिए विवरण के अनुसार, एक पोस्ट के लिए 60 से 65 लाख रुपये तक का सौदा और प्रारंभिक परीक्षा से इंटरव्यू तक चयन की गारंटी देने की बात सामने आई है। एजेंसी ने करीब 3 करोड़ रुपये के नकद लेन-देन का आरोप लगाया है।

बारनवापारा में 29 अभ्यर्थियों का कनेक्शन

CGPSC मामले की पिछली CBI जांच में बारनवापारा में 29 अभ्यर्थियों के लिए विशेष परीक्षा केंद्र बनाए जाने और उन्हें मामले में गवाह बनाए जाने की बात सामने आई थी। जांच के मुताबिक, यहां कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र के आधार पर अभ्यर्थियों को तैयारी कराई गई थी।

रायपुर में पेपर, फिर बारनवापारा में तैयारी का आरोप

जांच एजेंसियों के मुताबिक, कुछ अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र पहले उपलब्ध कराया गया और बाद में बारनवापारा में परीक्षा की तैयारी कराई गई। ED का आरोप है कि उत्कर्ष और विकास चंद्राकर ने अभ्यर्थियों से इस पूरी व्यवस्था के लिए रकम ली।

प्रभावशाली नामों के इस्तेमाल का भी आरोप

ED के मुताबिक, अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाने के लिए प्रभावशाली लोगों और पदों का हवाला दिया गया। उत्कर्ष चंद्राकर के संबंध तत्कालीन मुख्यमंत्री के PA रहे केके चंद्रवंशी से बताए गए हैं। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि तत्कालीन CMO में OSD रहे चेतन बोरघारिया के पद का इस्तेमाल भी भरोसा कायम करने के लिए किया गया।

2020-21 की परीक्षाओं से जुड़ी जांच

CGPSC की 2020 और 2021 की परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक और चयन प्रक्रिया में हेरफेर की जांच पहले EOW-ACB और बाद में CBI ने की। ED इसी मामले से जुड़े कथित अपराध से अर्जित रकम और उसके लेन-देन की PMLA के तहत जांच कर रही है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button