CHHATTISGARH | हाईकोर्ट ने रद्द किया आपराधिक केस, जरूर पढ़ें ये खबर

बिलासपुर. बिलासपुर हाईकोर्ट ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र के आरोप में फंसे एक शिक्षक को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि बिना पुख्ता सबूत के किसी पुराने सर्टिफिकेट को गलत ठहराकर आपराधिक केस चलाना सही नहीं है।
मामला महासमुंद के सहायक शिक्षक लखन बिहारी पटेल का है, जिन्हें 2010 में मेडिकल बोर्ड ने 45% सुनने की दिक्कत के आधार पर दिव्यांगता प्रमाणपत्र दिया था। इसी के आधार पर उन्हें नौकरी मिली। बाद में पारिवारिक विवाद के चलते शिकायत हुई और 2018 की मेडिकल जांच के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर दी गई।
हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि दिव्यांगता समय के साथ बदल सकती है, इसलिए पुराने वैध सर्टिफिकेट को बाद की रिपोर्ट के आधार पर गलत नहीं ठहराया जा सकता। जब तक यह साबित न हो कि सर्टिफिकेट बनाते समय धोखाधड़ी हुई थी, तब तक कार्रवाई का कोई आधार नहीं बनता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि मेडिकल मामलों में विशेषज्ञ संस्थाओं की राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसी आधार पर शिक्षक के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के आदेश को रद्द कर दिया गया।



