CG COAL SCAM | 25 लाख का वो भुगतान, चार्जशीट में बड़ा जिक्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाला मामले में EOW की ओर से सोमवार को पेश किए गए पूरक चालान में एक ऐसा भुगतान सामने आया है, जिसने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। चार्जशीट में देश के चर्चित कवि डॉ. कुमार विश्वास को 25 लाख रुपये दिए जाने का उल्लेख है। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह भुगतान कोयला घोटाले से जुड़ी रकम से किया गया था।
‘हमर भांचा राम’ कार्यक्रम से जुड़ा भुगतान
चार्जशीट में दर्ज जानकारी के अनुसार, कांग्रेस शासनकाल के दौरान रायपुर के इंडोर स्टेडियम में ‘हमर भांचा राम’ नाम से कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें देश के कई चर्चित कवियों को बुलाया गया था।
EOW की जांच में सामने आए दस्तावेजों के आधार पर दावा किया गया है कि कार्यक्रम से जुड़े खर्च का भुगतान उस रकम से किया गया, जिसे जांच एजेंसी ने कोयला घोटाले से संबंधित माना है।
इस लेनदेन का जिक्र चार्जशीट में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव और कोयला घोटाला मामले के आरोपी सूर्यकांत तिवारी के बीच हुई चैट के आधार पर किए जाने की बात सामने आई है।
चार्जशीट के पेज 66 पर 25 लाख का जिक्र
पूरक चालान के पेज नंबर 66 में कुमार विश्वास को 25 लाख रुपये के भुगतान का उल्लेख किया गया है। उपलब्ध विवरण में इस भुगतान का जिक्र विशेष रूप से किया गया है।
हालांकि, कार्यक्रम में शामिल अन्य कवियों को कितनी रकम दी गई या उनके भुगतान का क्या विवरण था, इसका उल्लेख उपलब्ध चार्जशीट के इस हिस्से में नहीं बताया गया है।
यानी जांच एजेंसी की ओर से सामने रखे गए दस्तावेजों में फिलहाल कुमार विश्वास को किए गए 25 लाख रुपये के भुगतान पर खास तौर पर ध्यान दिया गया है।
खैरागढ़ उपचुनाव के दौरान हुआ था कार्यक्रम
‘हमर भांचा राम’ कार्यक्रम उस समय आयोजित हुआ था, जब खैरागढ़ विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म था। कार्यक्रम को लेकर भाजपा ने उस समय निर्वाचन आयोग में शिकायत भी की थी।
भाजपा की ओर से आरोप लगाया गया था कि सरकार ने रामनवमी पर शोभायात्रा की अनुमति नहीं दी, जबकि कांग्रेस की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम को अनुमति दी गई।
अब कोयला घोटाला मामले की पूरक चार्जशीट में कुमार विश्वास को किए गए 25 लाख रुपये के भुगतान का उल्लेख सामने आने के बाद यह कार्यक्रम एक बार फिर चर्चा में है।
हालांकि, चार्जशीट में किसी भुगतान का उल्लेख होना अपने आप में किसी व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता साबित नहीं करता। मामले में जांच एजेंसी के आरोप और अदालत में साबित होने वाले तथ्य अलग-अलग कानूनी चरण हैं।



