CG FOUNDATION DAY | छत्तीसगढ़ का नाम कैसे पड़ा? इतिहास में छिपी है बड़ी कहानी!

रायपुर। आज छत्तीसगढ़ अपना 26वां स्थापना दिवस मना रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि छत्तीसगढ़ का नाम कैसे पड़ा और अलग राज्य बनने के पीछे कितने लंबे संघर्ष की कहानी छिपी है?
इतिहासकार डॉ. रमेंद्र नाथ मिश्र के मुताबिक, प्राचीन समय में यह क्षेत्र दक्षिण कोसल के नाम से जाना जाता था। यहां मौर्य, पांडुवंशी, सोमवंशी और कलचुरी शासकों का प्रभाव रहा।
आखिर क्यों पड़ा छत्तीसगढ़ नाम?
इतिहासकार के अनुसार, कलचुरी शासनकाल में रतनपुर और रायपुर की दो शाखाओं के अंतर्गत 18-18 गढ़ होने की मान्यता है। इन्हीं 36 गढ़ों से छत्तीसगढ़ नाम जुड़ा माना जाता है। साहित्य में इस नाम के प्रयोग का उल्लेख 1487 से मिलता है।
छत्तीसगढ़ का इतिहास केवल राजाओं तक सीमित नहीं रहा। गुरु घासीदास का सामाजिक जागरण, वीर नारायण सिंह का बलिदान और बस्तर के आदिवासी विद्रोह इसकी पहचान का अहम हिस्सा हैं। 1910 का भूमकाल विद्रोह भी इसी संघर्ष की बड़ी मिसाल है।
लंबे संघर्ष के बाद मिला अलग राज्य
डॉ. मिश्र बताते हैं कि वे खुद 36 वर्षों तक अलग राज्य के आंदोलन से जुड़े रहे। आखिरकार 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ नया राज्य बना।
हालांकि, स्थापना दिवस पर इतिहासकार ने प्रदेश के बौद्धिक विकास और शिक्षण संस्थानों की स्थिति पर चिंता भी जताई। उन्होंने शोध संस्थानों को सक्रिय करने और वीर नारायण सिंह के बलिदान दिवस पर शासकीय अवकाश घोषित करने की मांग की।
सवाल यही है कि 26 साल के सफर में छत्तीसगढ़ अपनी ऐतिहासिक विरासत को कितना सहेज पाया है?



