छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में महंगी बिजली स्टील उद्योग पर संकट

रायपुर। महंगी बिजली और बाजार की मंदी से इन दिनों स्टील उद्योगों पर संकट के बादल छाए हए हैं। बताया जा रहा है कि बाहरी क्षेत्रों के आधा दर्जन स्टील प्लांट प्लांट तो बंद हो चुके हैं तथा प्रदेश के स्टील उद्योगों की हालत खस्ता बनी हुई है। उद्योगपतियों का कहना है कि एक तो लोहा बाजार में पहले ही मंदी छाई है,उपर से बिजली की बढ़ी दरों ने उनकी कमर ही तोड़ दी है। इसके चलते बीते एक अगस्त से स्टील प्लांटों ने उत्पादन में कमी करने के साथ ही केवल एक शिफ्ट में ही उत्पादन कर रही है। बिजली की दरों में हुई बढ़ोतरी की वजह से प्रदेश के लौह उद्योगों की हालत काफी खराब होती जा रही है। बताया जा रहा है कि स्टील प्लांटों में उत्पादन में 25 फीसद की गिरावट कर दी गई है। साथ ही उद्योगपतियों ने फैसला लिया है कि एक अगस्त से अपने प्लांटों में केवल एक शिफ्ट में ही उत्पादन किया जाएगा ताकि लगातार हो रहे नुकसान को कम किया जा सके। छत्तीसगढ़ में 150 मिनी स्टील प्लांट है।
उद्योगपतियों के अनुसार ये प्लांट छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के कुल उत्पादन का करीब 30 फीसद सबसे बड़ा उपभोक्ता है। साथ ही विद्युत मंडल को 30 फीसद राजस्व भी देता है।साथ ही लगभग दो लाख परिवारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दे रहा है।
स्टील उद्योगों के विद्युत दर 2009-10 से 2018-19 के बीच में 212 फीसद बढ़ चुके है। लेकिन पड़ोंसी राज्यों जैसे महाराष्ट्र, ओडीसा, तेलंगाना, पंजाब आदि राज्यों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। उद्योगपतियों का कहना है कि बाहरी क्षेत्रों से आने वाला लोहा सस्ता पड़ता है और इसके चलते इन्हें प्रदेश में भी अपना लोहा सस्ता करना पड़ता है।
छत्तीसगढ़ मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन के महासचिव मनीष धुप्पड़ ने कहा कि लगातार हो रहे नुकसान को देखते हुए फैसला लिया गया है कि एक अगस्त से केवल एक शिफ्ट में ही उत्पादन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उद्योगों कों मिल रही सब्सिडी से बिजली की दर 5 रुपये प्रति यूनिट थी,जो सब्सिडी खत्म करने के बाह 6.50 रुपये प्रति यूनिट हो गई है।

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