CHHATTISGARH | सर्पदंश घोटाले का खौफ! तहसील में स्टाफ गायब

बिलासपुर। सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच की आंच बिलासपुर तहसील कार्यालय तक पहुंची तो दफ्तर की पूरी व्यवस्था ही लड़खड़ा गई। कार्रवाई के डर और कर्मचारियों की कमी से रिकॉर्ड रूम करीब एक महीने तक बंद पड़ा रहा। आम लोगों और वकीलों को जरूरी दस्तावेजों के लिए चक्कर काटने पड़े।
मामले में तीन लिपिक जेल जा चुके हैं, जबकि युक्तीयुक्तकरण के बाद पांच शिक्षक भी अपने मूल विभाग लौट गए। इसके बाद कार्यालय में कर्मचारियों की भारी कमी हो गई और कई जरूरी काम अटक गए।
समस्या बढ़ी तो SDM मनीष साहू ने कलेक्टर को पत्र लिखकर अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग की। अब कलेक्टोरेट से चार नए लिपिक तहसील कार्यालय को मिले हैं। साथ ही रिकॉर्ड रूम की जिम्मेदारी एक पटवारी को दी गई, जिसके बाद करीब एक महीने से बंद रिकॉर्ड रूम फिर खुल गया।
अब जमीन के नामांतरण, बटांकन, नक्शा, खसरा और बी-1 की प्रमाणित प्रतियां मिलने में लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
बताया जा रहा है कि सर्पदंश मुआवजा मामले में 17 करोड़ रुपये से ज्यादा के फर्जीवाड़े का आरोप है। जांच आगे बढ़ने के साथ तहसील कार्यालय के कर्मचारियों में कार्रवाई को लेकर डर का माहौल बना हुआ है।



