CHHATTISGARH | सलवा जुडूम कर्मियों पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को नोटिस!

बिलासपुर, 18 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व ‘सलवा जुडूम’ कर्मियों से जुड़े सेवा मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सरकार को छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले में सेवा शर्तों, समानता के अधिकार और कथित भेदभाव को लेकर अहम सवाल उठाए गए हैं।
सलवा जुडूम नक्सलवाद के खिलाफ छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में वर्ष 2005 के आसपास शुरू हुआ आंदोलन था। इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय आदिवासी ग्रामीण और युवा शामिल हुए थे। आंदोलन से जुड़े कुछ युवाओं को विशेष पुलिस अधिकारी (SPO) के रूप में नियुक्त किया गया था।
वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने नक्सलवाद विरोधी अभियानों में एसपीओ के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी। इसके बाद सलवा जुडूम से जुड़े कुछ कर्मियों को छत्तीसगढ़ सशस्त्र पुलिस बल में शामिल कर लिया गया। अब इन कर्मियों की सेवा शर्तों और उन्हें मिलने वाले लाभों को लेकर विवाद अदालत पहुंचा है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता फटेश कुमार साहू और विद्याभूषण सोनी पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि कर्मियों के साथ कथित भेदभाव हुआ और उन्हें समानता के आधार पर सेवा लाभ नहीं मिले।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का हवाला देते हुए समान व्यवहार और सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने सेवा संबंधी अधिकारों पर उचित विचार करने की मांग की है।
अब राज्य सरकार के जवाब के बाद मामले में आगे की स्थिति साफ होगी।



