FORMER JUDGES LETTER | 42 पूर्व जजों की चिट्ठी, ‘वोट चोरी’ पर उठाए सवाल
रायपुर डेस्क। चुनाव आयोग और मतदाता सूची के SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच 42 पूर्व जजों ने संयुक्त खुला पत्र जारी कर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर चिंता जताई है। पूर्व जजों ने बिना ठोस सबूत ‘वोट चोरी’ जैसे आरोप लगाए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कमजोर हो सकता है।
SIR का किया बचाव
पूर्व जजों ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को कानूनी प्रक्रिया बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य मतदाता सूची को साफ और सटीक रखना है। पत्र में कहा गया कि संस्थाओं की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन्हें बदनाम करने से बचना चाहिए।
चुनाव आयोग और न्यायपालिका का जिक्र
पत्र में चुनाव आयोग को लेकर चल रहे विवाद के साथ न्यायपालिका और अन्य वैधानिक संस्थाओं पर हो रही टिप्पणियों पर भी चिंता जताई गई। पूर्व जजों के मुताबिक, गंभीर आरोपों को सार्वजनिक मंचों के बजाय उचित कानूनी प्रक्रिया के जरिए सबूतों के साथ उठाया जाना चाहिए।
पत्र पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस पंकज मित्तल समेत कई पूर्व न्यायिक अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए हैं। तीन पूर्व हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीश भी हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल हैं।
राहुल गांधी के प्रदर्शन के बीच आई चिट्ठी
यह पत्र ऐसे समय सामने आया है जब SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष का विरोध जारी है। 7 अक्टूबर को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और विपक्षी सांसदों ने जंतर-मंतर की ओर मार्च किया था, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था।
पूर्व जजों ने पत्र में लोकतंत्र में जनता के भरोसे को सबसे अहम बताते हुए संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने की अपील की है।



