CHHATTISGARH | CGPSC घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का एंगल!

रायपुर। CGPSC-2021 भर्ती घोटाले की जांच अब सिर्फ परीक्षा में कथित गड़बड़ी तक सीमित नहीं रह गई है। ED और CBI की जांच में कथित पैसों के लेन-देन और संदिग्ध फंड ट्रांसफर की परतें खुलने का दावा किया गया है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, डिप्टी कलेक्टर और DSP जैसे पदों पर चयन के बदले कथित तौर पर बड़ी रकम ली गई। CBI की जांच में 47 लाख रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और 1.3 करोड़ रुपये की कथित अवैध वसूली के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।
ED का आरोप है कि भर्ती के बदले कथित तौर पर ली गई रकम का एक हिस्सा ‘ग्रामीण विकास समिति’ के जरिए ट्रांसफर किया गया। एजेंसी के मुताबिक, संस्था से जुड़े कई लोग तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के परिजन या करीबी थे। उनकी पत्नी पद्मनी सिंह सोनवानी संस्था की अध्यक्ष थीं। अब इस पूरे नेटवर्क की जांच मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से की जा रही है।
CBI की चार्जशीट में कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर को कथित मुख्य बिचौलिया बताया गया है। एजेंसी का दावा है कि उसने अभ्यर्थियों से प्रश्नपत्र और चयन का भरोसा देकर 1.3 करोड़ रुपये वसूले। अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद से वह फरार बताया जा रहा है।
जांच एजेंसियां टामन सिंह सोनवानी के कार्यकाल में हुई 12 से ज्यादा भर्ती परीक्षाओं की भी जांच कर रही हैं। मामले में कुल 29 लोगों को आरोपी बनाया गया है। हालांकि, आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।



