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BILASPUR NIGAM PLOT SCAM | निगम में प्लॉट आवंटन को लेकर बड़ा बवाल…

 

बिलासपुर। बिलासपुर नगर निगम में व्यापार विहार के प्लॉट और दुकानों के आवंटन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। पूर्व महापौर रामशरण यादव, तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन और कई कारोबारियों के नाम शिकायत में शामिल होने के बाद मामला गरमा गया है। कोर्ट के आदेश पर सिविल लाइन पुलिस जांच कर रही है।

परिवाद में आरोप लगाया गया है कि व्यापार विहार के 10 से ज्यादा खाली प्लॉट और दुकानों के आवंटन में गड़बड़ी की गई। शिकायत के मुताबिक, जमीन खरीदारों निखिल अग्रवाल, रीता अग्रवाल, रितु अग्रवाल, अमृति अग्रवाल और चित्रांगदा अग्रवाल की ओर से कथित तौर पर रिश्वत देकर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।

मामला वर्ष 2020-21 का बताया जा रहा है, जब प्लॉट नंबर A-23 की करीब 7500 वर्गफुट जमीन की रजिस्ट्री गणेश ट्रेडर्स के निखिल अग्रवाल के नाम हुई थी। आरोप है कि दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर जमीन का सीमांकन बदला गया, जिससे अतिरिक्त जमीन की कीमत कम हो गई और बाद में वही जमीन भी उसी पक्ष के नाम कर दी गई।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि निविदा प्रक्रिया के दौरान अन्य बोलीदाताओं के टेंडर फॉर्म कथित रूप से पहले ही खोलकर देखे गए और फिर नए सिरे से टेंडर भरवाए गए। हालांकि, तत्कालीन कलेक्टर को गड़बड़ी की आशंका हुई और पूरी टेंडर प्रक्रिया को ही निरस्त कर दिया गया।

टेंडर रद्द होने के बाद कथित लेनदेन और पैसे वापसी को लेकर विवाद शुरू हो गया। दूसरी ओर, तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन ने भी पुलिस को शिकायत देकर कुछ लोगों पर धमकी, दबाव और बंधक बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

पूर्व महापौर रामशरण यादव ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि जब दुकानों और प्लॉटों का आवंटन ही नहीं हुआ, तो लेनदेन का सवाल ही नहीं उठता। उनका कहना है कि टेंडर पहले ही रद्द कर दिया गया था।

सिविल लाइन सीएसपी के मुताबिक, मामला कोर्ट में विचाराधीन है और न्यायालय के निर्देश पर निष्पक्ष जांच की जा रही है। वहीं महापौर पूजा विधानी ने कहा है कि निगम स्तर पर भी अलग से जांच समिति बनाई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

 

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